पुरी से सांसद व मणिपुर में भाजपा के प्रभारी संबित पात्रा को भी ज़ेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई।
दलाई लामा को अब ज़ेड श्रेणी की सीआरपीएफ सुरक्षा मिलेगी। गृह मंत्रालय ने खुफिया विभाग (आईबी) की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया है। लगभग 30 सीआरपीएफ कमांडो की एक टीम उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेगी। अब तक दलाई लामा को हिमाचल प्रदेश पुलिस का एक सीमित सुरक्षा कवर मिला हुआ था। जब भी वह दिल्ली या अन्य स्थानों की यात्रा करते थे, तो स्थानीय पुलिस उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती थी। लेकिन अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की वीआईपी सुरक्षा शाखा को 89 वर्षीय दलाई लामा की सुरक्षा का कार्यभार सौंप दिया है। देश के सभी हिस्सों में अब सीआरपीएफ कमांडो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। सरकार ने केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया है, ताकि उन्हें एक समान सुरक्षा कवच प्रदान किया जा सके।
सन 1935 में ल्हामो थोंडुप के रूप में जन्मे दलाई लामा को मात्र दो वर्ष की उम्र में ही उनके पूर्ववर्ती तिब्बती धर्मगुरु का पुनर्जन्म माना गया था। सन् 1940 में उन्हें तिब्बत की राजधानी ल्हासा में 14वें दलाई लामा के रूप में आधिकारिक मान्यता दी गई। सन् 1950 में चीन ने तिब्बत पर आक्रमण कर दिया, और 1959 में चीन के खिलाफ हुए असफल विद्रोह के बाद, दलाई लामा भारत आ गए। तब से वह हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में निर्वासन में रह रहे हैं। सन् 1989 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने मॉनेस्टिक शिक्षा प्राप्त की है और वर्षों से तिब्बती लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वह अब तक छह महाद्वीपों और 67 से अधिक देशों की यात्रा कर चुके हैं। चीन के तिब्बत पर कब्जे के बाद दलाई लामा को भारत में निर्वासित जीवन व्यतीत करते हुए 62 वर्ष से अधिक हो चुके हैं।






