पनामा ने भारत को अमेरिका से निर्वासित भारतीयों के एक समूह के बारे में सूचित किया है और देश में भारतीय मिशन, उन्हें काउंसलर एक्सेस प्रदान करने के बाद, उनकी भलाई सुनिश्चित करने के लिए मेजबान सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है। ये लोग पिछले हफ्ते तीन उड़ानों के जरिए पनामा पहुंचे, जब राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो ने यह सहमति दी कि पनामा निर्वासितों के लिए एक अस्थायी ठहराव बिंदु बनेगा।
अमेरिका से निर्वासन, घर वापस न पहुंच पाने की अनिश्चितता और अन्य परेशानियों के चलते 300 लोग पनामा के एक होटल में फंसे हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा भारतीय नागरिक हैं, इसके अलावा नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और चीन के नागरिक भी शामिल हैं। इन सभी को तब तक होटल में रहना होगा, जब तक उनकी वापसी की व्यवस्था नहीं हो जाती, और उन्हें होटल से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, 40% से अधिक प्रवासी अपने देश लौटने के लिए तैयार नहीं हैं। होटल में बंद इन प्रवासियों की हालत बेहद खराब है, जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे खिड़कियों पर संदेश लिखकर मदद की गुहार लगा रहे हैं। होटल से सामने आई तस्वीरों में लोग हाथों में सादे कागज लिए खड़े दिख रहे हैं, जिन पर लिखा है – “मदद करें” और “हम अपने देश में सुरक्षित नहीं हैं।”
इन 10 एशियाई देशों से हैं प्रवासी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये सभी 10 एशियाई देशों के नागरिक हैं, जिनमें ईरान, भारत, नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और चीन शामिल हैं। अमेरिका के लिए इन देशों में सीधे निर्वासन करना मुश्किल है, इसलिए पनामा को एक अस्थायी ठहराव के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रवासियों को दी जा रही बुनियादी सुविधाएं
पनामा के सुरक्षा मंत्री फ्रैंक एब्रेगो का दावा है कि सभी प्रवासियों को चिकित्सा सुविधाएं और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यह संपूर्ण व्यवस्था अमेरिका और पनामा के बीच हुए एक समझौते के तहत संचालित हो रही है, जिसका पूरा खर्च अमेरिका वहन कर रहा है। वहीं, पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो, जो ट्रंप की पनामा नहर पर नियंत्रण संबंधी धमकियों के कारण राजनीतिक दबाव में हैं, ने पिछले गुरुवार को पहली निर्वासन उड़ान के आगमन की घोषणा की थी।
प्रवासियों की वापसी की प्रक्रिया
रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 300 में से 171 प्रवासी अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सहायता से अपने-अपने देशों में लौटने के लिए सहमत हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन शेष 128 प्रवासियों के लिए अन्य देशों में बसने के विकल्प तलाश रहे हैं। वहीं, जो प्रवासी अपने देश लौटने के लिए तैयार नहीं हैं, उन्हें पनामा के दारिएन प्रांत के एक विशेष केंद्र में रखा जाएगा।





