अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू की गई ‘टैरिफ वॉर’ (शुल्क युद्ध) पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस कदम से कई देशों की चिंता बढ़ गई है, खासकर उन देशों की जिनके अमेरिका से रिश्ते अच्छे नहीं हैं। ऐसे ही देशों में ईरान भी शामिल है, जो पहले से ही अमेरिका के प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। फिलहाल इन प्रतिबंधों पर 90 दिनों की अस्थायी राहत दी गई है, लेकिन इसके बाद हालात और खराब हो सकते हैं। इसी आशंका के चलते ईरान ने भारत से सहयोग की उम्मीद जताई है।
ईरान की भारत से अपेक्षा
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध हैं। ईरान भारत को एक भरोसेमंद मित्र मानता है और अब वह इन रिश्तों को और गहराई देना चाहता है, ताकि ट्रंप की टैरिफ नीति से निपटा जा सके। ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने भी इस विषय पर खुलकर बात की है।
व्यापारिक संबंधों को और मज़बूत करने की जरूरत
खामेनेई का मानना है कि भारत, रूस और चीन जैसे देशों के साथ ईरान को अपने व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को और मज़बूत करना चाहिए। इससे न सिर्फ ईरान को आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि इन देशों के लिए भी यह फायदेमंद साबित होगा।
पाकिस्तान से दूरी बनाए रखना चाहता है ईरान
खामेनेई ने एशियाई देशों के साथ रिश्तों की बात तो की, लेकिन पाकिस्तान का कोई उल्लेख नहीं किया, जिससे साफ है कि ईरान पाकिस्तान के साथ गहरे संबंधों में दिलचस्पी नहीं रखता।
भारत दौरे की तैयारी में ईरानी विदेश मंत्री
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची जल्द ही भारत का दौरा कर सकते हैं। इस दौरे में वे द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ बनाने पर चर्चा करेंगे। इससे पहले उन्होंने भारत को चाबहार पोर्ट परियोजना में एक भरोसेमंद साझेदार बताया था। ईरान का मानना है कि भारत, रूस और चीन के साथ सहयोग बढ़ाकर न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है, बल्कि ये तीनों देश भी आर्थिक रूप से लाभान्वित हो सकते हैं।





