सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2015 के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा है कि ताजमहल के 5 किलोमीटर के भीतर बिना अनुमति के पेड़ नहीं काटे जा सकते। अगर पेड़ों की संख्या 50 से कम भी हो, तब भी अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि ताजमहल से 5 किमी से बाहर लेकिन टीटीजेड (ताज ट्रेपेजियम ज़ोन) के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में पेड़ काटने के लिए केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के अंतर्गत आने वाले प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। ये अधिकारी उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम के तहत कार्य करेंगे।
2015 का आदेश रहेगा लागू
पीठ ने कहा कि ताजमहल के 5 किलोमीटर के भीतर पेड़ों की कटाई के संबंध में 8 मई 2015 का मूल आदेश लागू रहेगा। ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेनी होगी, भले ही कटने वाले पेड़ों की संख्या 50 से कम हो। कोर्ट पहले CEC से सिफारिश मांगेगी और फिर कटाई पर विचार होगा। यह भी कहा गया कि जब तक पेड़ों को काटना अत्यंत आवश्यक न हो, तब तक DFO यह सुनिश्चित करेगा कि प्रतिपूरक वृक्षारोपण जैसी शर्तों का पूरा पालन किया जाए।
आपको बता दें 8 मई 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि टीटीजेड (ताज ट्रेपेजियम ज़ोन) में किसी भी पेड़ की कटाई बिना अदालत की अनुमति के नहीं की जा सकती। इसका उद्देश्य वनों की कटाई रोकना और जैव विविधता की रक्षा करना था। हालांकि, 11 दिसंबर 2019 को कोर्ट ने संशोधन कर गैर-वन और निजी ज़मीन पर कटाई के लिए पूर्व अनुमति की अनिवार्यता हटा दी थी।
आगरा के ट्रस्ट की याचिका खारिज
कोर्ट ने एक ट्रस्ट की याचिका खारिज कर दी, जिसमें निजी भूमि पर पेड़ काटने की पूर्व अनुमति की शर्त से छूट की मांग की गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल ऐसे अपवादों में पेड़ काटने की इजाज़त दी जा सकती है, जहाँ पेड़ के गिरने से मानव जीवन को खतरा हो। सुप्रीम कोर्ट ने CEC से यह रिपोर्ट भी मांगी है कि आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसे विश्व धरोहर स्थलों की सुरक्षा के लिए कोई अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की ज़रूरत है या नहीं।
क्या है ताज ट्रेपेजियम ज़ोन
ताज ट्रेपेजियम ज़ोन (TTZ) एक विशेष पर्यावरणीय क्षेत्र है, जो ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए बनाया गया है। यह ज़ोन लगभग 10,400 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिसमें उत्तर प्रदेश के आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, हाथरस, एटा और राजस्थान का भरतपुर ज़िला शामिल हैं।






