भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को जून महीने की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के निर्णयों की घोषणा की। यह बैठक 4 से 6 जून तक तीन दिनों तक चली। इसमें रेपो रेट और नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कटौती सहित कई अहम निर्णय लिए गए।
जून की मौद्रिक नीति की 10 मुख्य बातें:
- रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है। अब यह 6% से घटकर 5.5% हो गई है।
- केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति के रुख को ‘उदार’ से बदलकर अब ‘तटस्थ’ कर दिया है।
- नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है, जिससे नवंबर तक बैंकिंग प्रणाली में 2.5 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त तरलता आएगी।
- वित्त वर्ष 2025-26 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान घटाकर 3.7% कर दिया गया है।
- प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में नरमी को देखते हुए मुद्रास्फीति में राहत की संभावना जताई गई है।
- वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.5% पर यथावत रखा गया है।
- चालू खाता घाटा (सीएडी) में स्थिरता की उम्मीद जताई गई है।
- आरबीआई के विदेशी मुद्रा भंडार में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है, 30 मई 2025 तक यह 692.7 अरब डॉलर से घटकर 691.5 अरब डॉलर रह गया।
- अगली मौद्रिक नीति समिति की बैठक 4 से 6 अगस्त के बीच आयोजित की जाएगी।
- प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर केंद्रीय बैंक के रुख में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि क्रिप्टो वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिमपूर्ण बना हुआ है।





