देशभर में जातिगत गणना और जनगणना से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना सोमवार को जारी की जाएगी। यह जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी और इसके लिए विशेष मोबाइल एप बनाए गए हैं। इन एप्स के माध्यम से जनगणना से जुड़ी समस्त जानकारी एकत्र की जाएगी और ये 16 विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध रहेंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को जनगणना की तैयारियों की समीक्षा करते हुए एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें गृह सचिव गोविंद मोहन, महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सरकारी बयान में बताया गया कि यह पहली डिजिटल जनगणना होगी। गृह मंत्री ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि इस 16वीं जनगणना में पहली बार जाति आधारित गणना भी की जाएगी। इस प्रक्रिया में 34 लाख गणक और सुपरवाइजर तथा 1.3 लाख जनगणना अधिकारी अत्याधुनिक मोबाइल और डिजिटल उपकरणों के साथ भाग लेंगे।
जनगणना होगी दो चरणों में
जनगणना कार्य दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में मकान सूचीकरण व मकानों की गणना (एचएलओ) की जाएगी, जिसमें हर परिवार की आवासीय स्थिति, संपत्तियों और सुविधाओं का विवरण दर्ज होगा। दूसरे चरण में जनसंख्या गणना के तहत प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक व जन-सांख्यिकीय जानकारी एकत्र की जाएगी। जातिगत गणना और जनगणना की शुरुआत जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 1 अक्तूबर, 2026 से होगी, जबकि देश के अन्य हिस्सों में यह कार्य 1 मार्च, 2027 से शुरू किया जाएगा।
आजादी के बाद आठवीं जनगणना
यह भारत की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद की आठवीं जनगणना होगी। इसे पूरी तरह डिजिटल माध्यम से मोबाइल एप के जरिए संचालित किया जाएगा। नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन यानी स्वयं से आंकड़े भरने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जानकारी के संग्रहण, ट्रांसमिशन और संग्रहण के दौरान सख्त सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा। गौरतलब है कि पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी और इस बार यह जनगणना 16 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद की जा रही है।



