
शहीदों का त्याग राष्ट्र की अमूल्य विरासत
जलियांवाला बाग नरसंहार की बरसी पर देशभर में शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित अनेक नेताओं ने इस अवसर पर बलिदानियों को नमन करते हुए उनके त्याग को राष्ट्र की अमूल्य विरासत बताया। नेताओं ने कहा कि इन वीरों का बलिदान देश की आजादी की नींव है और यह आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि जलियांवाला बाग में शहीद हुए स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान देशवासियों में स्वतंत्रता के प्रति नई ऊर्जा और संकल्प का संचार करता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र उनके प्रति हमेशा आभारी रहेगा और उनकी देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।
बलिदान अदम्य राष्ट्रीय भावना का प्रतीक: मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका त्याग भारत की अटूट और अदम्य भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इन वीरों का साहस, समर्पण और संकल्प आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता, न्याय और गरिमा की रक्षा के लिए प्रेरित करता रहेगा। एक अन्य संदेश में उन्होंने इस नरसंहार को विदेशी शासन की क्रूरता का प्रतीक बताया और कहा कि शहीदों की वीर गाथाएं देश की हर पीढ़ी को प्रेरणा देती रहेंगी। इस मौके पर उन्होंने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया, जिसमें राष्ट्रनिर्माण की सकारात्मक शक्तियों को बढ़ावा देने और अन्याय के विरुद्ध दृढ़ता से खड़े होने का संदेश निहित है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में निहत्थे लोगों पर की गई अंधाधुंध गोलीबारी ने अंग्रेजी हुकूमत के अमानवीय चेहरे को उजागर कर दिया था। उन्होंने कहा कि इस भयावह घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और भगत सिंह व ऊधम सिंह जैसे क्रांतिकारियों के भीतर स्वतंत्रता की ज्वाला को और प्रबल किया। उन्होंने इसे स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताते हुए कहा कि यहीं से आजादी की लड़ाई को नई दिशा और गति मिली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 1919 में इसी दिन निर्दोष भारतीयों का बलिदान देश के स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक अध्याय बन गया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने देश की सामूहिक चेतना को जागृत किया और आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी। उनके अनुसार, शहीदों का साहस आज भी लोगों को न्याय, आत्मसम्मान और गरिमा के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने जलियांवाला बाग की घटना को भारतीय इतिहास का ऐसा अध्याय बताया, जिसने पूरे राष्ट्र को एकजुट कर स्वतंत्रता के संघर्ष को और मजबूत किया।




