मतदाता सूची में नाम जोड़ने, जानकारी अपडेट करने या संशोधन के बाद अब 15 दिन के भीतर नया वोटर आईडी कार्ड मिल जाएगा। चुनाव आयोग ने इसके लिए एक नई प्रक्रिया लागू कर दी है। पहले जहां वोटर कार्ड मिलने में एक महीने से अधिक का समय लगता था, अब यह कार्य केवल दो सप्ताह में पूरा होगा।
चुनाव आयोग के अनुसार, अब मतदाता अपने कार्ड की स्थिति को हर चरण पर रियल-टाइम में ट्रैक कर सकेंगे। जैसे ही निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी द्वारा कार्ड तैयार किया जाएगा, उसके बाद से लेकर कार्ड की डिलीवरी तक की जानकारी एसएमएस के माध्यम से मतदाता को मिलती रहेगी।
इस नई प्रणाली के लिए आयोग ने ECINet नाम का नया आईटी प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जो पुराने सिस्टम की जगह लेगा। इससे प्रक्रिया तेज होगी और डेटा भी अधिक सुरक्षित रहेगा। डाक विभाग का एपीआई भी इस सिस्टम से जुड़ा रहेगा, जिससे कार्ड की डिलीवरी में कोई रुकावट नहीं आएगी। आयोग का उद्देश्य मतदाताओं को बेहतर सेवा देना और डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की जाएगी ताकि चुनाव प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। बिहार विधानसभा चुनाव से इसकी शुरुआत होगी। अभी तक केवल 50% बूथों पर ही वेबकास्टिंग होती थी, लेकिन अब इसे 100% किया जाएगा। यह डेटा आंतरिक उपयोग के लिए होगा।
आधार से जोड़ा जाएगा वोटर कार्ड
आयोग ने बताया कि वोटर आईडी को आधार से लिंक करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इसका उद्देश्य डुप्लीकेट मतदाताओं को हटाना और मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी बनाना है। इसके लिए चुनाव आयोग, गृह मंत्रालय, विधि मंत्रालय, आईटी मंत्रालय और यूआईडीएआई के अधिकारियों के बीच उच्च स्तरीय बैठक भी हो चुकी है। इस पूरी पहल का मकसद है, तेजी पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ बेहतर चुनावी अनुभव देना।





