बीकानेर: निजी स्कूल अब अभिभावकों को निश्चित दुकानों से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। यदि कोई स्कूल ऐसा करता है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में सभी पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों (पीईईओ) को जांच के निर्देश दिए हैं।
यह कदम मानवाधिकार आयोग के स्वत: संज्ञान के बाद उठाया गया है। आयोग ने सभी जिलाधिकारियों और जिला शिक्षा अधिकारियों से इस प्रकार की शिकायतों की जांच कराने को कहा है। अक्सर शिकायतें मिलती हैं कि कुछ निजी स्कूल अभिभावकों को केवल उन्हीं दुकानों से किताबें, रेफरेंस बुक्स और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य करते हैं, जो स्कूल से जुड़ी होती हैं या जिनसे उनका व्यापारिक संबंध होता है। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और उन्हें विकल्प नहीं मिलते। शिक्षा विभाग ने पहले भी आदेश जारी किए थे कि स्कूल अभिभावकों को किताबें और ड्रेस खरीदने के लिए किसी एक दुकान तक सीमित नहीं कर सकते। हर साल नए सत्र की शुरुआत से पहले ये आदेश दोहराए जाते हैं, ताकि स्कूलों की मनमानी पर लगाम लग सके और अभिभावकों को अपनी पसंद की दुकान से खरीदारी की स्वतंत्रता मिले।
राजस्थान: किसी विशेष जगह से किताबें और ड्रेस खरीदने के लिए निजी स्कूल नहीं कर सकेंगे बाध्य






