अमेरिका द्वारा भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ गई थी। खासकर हैंडीक्राफ्ट, चमड़ा, वस्त्र, रेशम, पीतल और ज्वैलरी से जुड़े कारोबारियों को बड़ा झटका लगा है। कई अमेरिकी खरीदारों ने ऑर्डर देने बंद कर दिए हैं या पहले से दिए गए ऑर्डर रोक दिए हैं। इन हालातों में भारत सरकार से जल्द हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।
हालांकि, अमेरिका ने इस टैरिफ को फिलहाल 7 दिनों के लिए टाल दिया है, जिसे एक अस्थायी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टैरिफ लागू होता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा और जीडीपी में 0.3 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है।
इस बीच केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने ट्रंप के “कमजोर भारतीय अर्थव्यवस्था” वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। उन्होंने साफ किया कि भारत किसी के दबाव में काम नहीं करेगा और समानता के आधार पर ही व्यापार करेगा।
उधर, अमेरिकी टैरिफ के मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधते हुए कहा कि “भारत एक डेड इकोनॉमी (जर्जर अर्थव्यवस्था) बन चुका है” और सरकार अमेरिका की शर्तों पर ही व्यापार समझौते करेगी।
इस विवाद के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-रूस के आर्थिक रिश्तों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों देशों की ‘डेड इकोनॉमी’ नीचे जा रही है। जवाब में रूस के पूर्व राष्ट्रपति मेदवेदेव ने उन्हें अपनी पसंदीदा ज़ॉम्बी फिल्में फिर से देखने की सलाह दी और कहा कि ‘डेड हैंड’ (सोवियत काल की एक परमाणु प्रतिक्रिया प्रणाली) जैसी अवधारणाएं अब भी खतरनाक साबित हो सकती हैं।
गौरतलब है कि ट्रंप ने दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद 2 अप्रैल को कई देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसे पहले 31 जुलाई तक टाल दिया गया था। अब एक बार फिर इसकी तिथि 7 दिन और आगे बढ़ा दी गई है। चीन ने अमेरिकी टैरिफ का सबसे आक्रामक जवाब दिया था और दोनों देशों ने मई में आपसी सहमति से टैरिफ दरें कम करके व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत शुरू की थी।
अमेरिका ने भारत पर लगाए 25% टैरिफ को 7 दिनों के लिए टाला




