भारत में टाइप 5 डायबिटीज का बढ़ता खतरा: कुपोषण बन रहा है बीमारी का कारण

भारत जैसे विकासशील देशों में बचपन का कुपोषण एक गंभीर समस्या है, लेकिन अब यह एक नई तरह की डायबिटीज का कारण भी बन रहा है, जिसे टाइप 5 डायबिटीज कहा जा रहा है।

क्या है टाइप 5 डायबिटीज?
आमतौर पर डायबिटीज को खराब खानपान, मोटापा या जीवनशैली से जोड़ा जाता है। लेकिन अब शोध में सामने आया है कि बचपन में कुपोषण के कारण भी डायबिटीज हो सकती है। इस नई श्रेणी को टाइप 5 डायबिटीज नाम दिया गया है। वर्ष 2017 में इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन ने इसे मान्यता दी। तमिलनाडु में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि कुपोषण के कारण अग्नाशय (पैंक्रियास) का समुचित विकास नहीं हो पाता, जिससे आगे चलकर यह रोग हो सकता है। इस प्रकार की डायबिटीज को “लीन डायबिटीज” भी कहा जाता है क्योंकि इसमें व्यक्ति का वजन सामान्य से कम होता है, लेकिन ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा हुआ हो सकता है।

टाइप 1, 2 और 5 में क्या अंतर है?

प्रकार मुख्य कारण शुरुआत उपचार

टाइप 1 ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया किसी भी उम्र में जीवनभर इंसुलिन
टाइप 2 जीवनशैली आनुवंशिकता वयस्क या युवा दवाएं और खानपान में बदलाव
जेस्टेशनल गर्भावस्था के हार्मोन गर्भवती महिलाएं आहार, कभी-कभी इंसुलिन
टाइप 5 बचपन का कुपोषण जीवन के शुरुआती वर्ष अभी स्थायी इलाज तय नहीं

लक्षण और इलाज
टाइप 5 डायबिटीज में आमतौर पर कम वजन, भूख न लगना, ऊर्जा की कमी जैसे लक्षण देखे जाते हैं। इसका कोई सुनिश्चित इलाज अभी तक नहीं है, लेकिन अच्छी बात यह है कि 90% मामलों में इंसुलिन की जरूरत नहीं पड़ती। मरीजों को उच्च कैलोरी और उच्च प्रोटीन वाला आहार दिया जाता है। यह परंपरागत डायबिटीज उपचार के विपरीत है, जिसमें कार्ब्स और मीठे से परहेज की सलाह दी जाती है।


भारत में क्यों है यह गंभीर चिंता का विषय?
भारत में डायबिटीज के 10 करोड़ से ज्यादा मरीज हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें बड़ी संख्या में ग्रामीण या गरीब क्षेत्रों के वे लोग शामिल हैं जो टाइप 5 डायबिटीज से पीड़ित हो सकते हैं, लेकिन उन्हें टाइप 1 या 2 समझकर इलाज किया जा रहा है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि यदि बचपन में पोषण सही तरीके से दिया जाए तो इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है। बच्चों के पहले पांच वर्ष उनके शारीरिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।

अन्य दुर्लभ प्रकार की डायबिटीज:
• नियॉनैटल डायबिटीज: शिशुओं में पाई जाती है, कभी-कभी दवाओं से नियंत्रण में आ जाती है।
• सिस्टिक फाइब्रोसिस-संबंधित डायबिटीज: सिस्टिक फाइब्रोसिस वाले करीब 33% लोगों में यह पाई जाती है।
• मोडी डायबिटीज: आनुवंशिक रूप से जुड़ी होती है और अग्नाशय के विकास या इंसुलिन-संवेदनशीलता को प्रभावित करती है।
• टाइप 3C डायबिटीज: अग्नाशय को नुकसान (जैसे कैंसर या सूजन) के बाद होती है।

डायबिटीज सिर्फ जीवनशैली से जुड़ी समस्या नहीं है, इसके कई रूप हैं जिनमें से टाइप 5 एक उभरती हुई चुनौती है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए सबसे जरूरी है बच्चों को प्रारंभिक जीवन में सही पोषण देना। हमें व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से बचपन के कुपोषण को रोकने की दिशा में गंभीर प्रयास करने होंगे, क्योंकि स्वस्थ बचपन ही एक स्वस्थ भविष्य की नींव रखता है।

नोट- संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading