भारत में डॉक्टर और रोगी के बीच अनुपात विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्धारित मानक से बेहतर

2014 के मुकाबले मेडिकल कॉलेजों की संख्या में 88 प्रतिशत की बढ़ोतरी, एमबीबीएस की 118 फीसदी सीटें बढ़ी
केंद्र ने शुक्रवार को कहा कि भारत में डॉक्टर-रोगी अनुपात विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित 1:1000 मानक से बेहतर है. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जुलाई 2024 तक राज्य चिकित्सा परिषदों और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के साथ 13,86,136 एलोपैथिक डॉक्टर पंजीकृत हैं.
स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में कहा, ‘यह मानते हुए कि पंजीकृत एलोपैथिक डॉक्टरों की 80 प्रतिशत उपलब्धता है और लगभग 5.65 लाख आयुष डॉक्टर हैं. देश में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात लगभग 1:836 है. ये विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक 1:1000 से बेहतर है.’ उन्होंने कहा कि देश में 731 मेडिकल कॉलेज हैं. इनमें हर साल 1,12,112 एमबीबीएस सीट होती है. उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा अभी 72,627 पीजी सीट है.’ पटेल ने कहा कि सरकार ने मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाई है और इसके बाद एमबीबीएस सीटों में भी बढ़ोतरी की है. उन्होंने कहा, ‘मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2014 से पहले 387 से 88 प्रतिशत बढ़कर 731 हो गई है. इसके अलावा, एमबीबीएस सीटों में 2014 से पहले 51,348 से 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और अब 1,12,112 हो गई है. इसी तरह पीजी सीटों में 2014 से पहले 31,185 से 133 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और अब 72,627 हो गई है.’
देश में चिकित्सा शिक्षा सुविधाओं को बढ़ाने और चिकित्सा मानकों में सुधार के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और उपायों के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि जिला और रेफरल अस्पतालों को उन्नत करके नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए एक केंद्र प्रायोजित योजना है. इसके तहत 157 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है. इनमें से 109 पहले से ही कार्यरत हैं. एमबीबीएस (UG) और पीजी सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए मौजूदा राज्य सरकार और केंद्र सरकार के मेडिकल कॉलेजों को मजबूत बनाने और उन्नत बनाने के लिए सीएसएस योजना है. इसके तहत 5972.20 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से 83 कॉलेजों में 4977 एमबीबीएस सीटों की वृद्धि के लिए सहायता प्रदान की गई है. इसके साथ ही 1498.43 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से 72 कॉलेजों में प्रथम चरण में 4058 पीजी सीट उपलब्ध कराया जाएगा. दूसरे चरण में 4478.25 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से 65 कॉलेजों में 4000 पीजी सीट की व्यवस्था की जाएगी.

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading