
आज अक्षय तृीया से चारधाम यात्रा शुरू हो रही है। इससे पहले ही हजारों श्रद्धालु गंगोत्री और यमुनोत्री धाम पहुंच चुके हैं। दोनों धामों के कपाट खुलने के साथ ही यात्रा शुरू हो गई।
आज से पवित्र चारधाम यात्रा का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। यात्रा की शुरुआत के साथ ही सबसे पहले गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल गए। निर्धारित समय के अनुसार यमुनोत्री मंदिर के कपाट दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर खुले, जबकि गंगोत्री मंदिर के कपाट शुभ मुहूर्त में 12 बजकर 15 मिनट पर खुले। इस अवसर पर दोनों धामों के मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया है और फूलों की आकर्षक सजावट से पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है। यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। यात्रा मार्गों से लेकर धाम क्षेत्रों तक सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है। दुकानों, होटलों और अन्य सुविधाओं को यात्रियों के स्वागत के लिए तैयार रखा गया है। हीना और दोबाटा स्क्रीनिंग प्वाइंट पर स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की तैनाती के साथ ही पंजीकरण प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस विभाग ने गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा को दो सुपरजोन, 12 जोन और 30 सेक्टरों में विभाजित किया है। प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। यात्रा मार्ग पर थाने, पुलिस चौकियां और विशेष निगरानी इकाइयों की तैनाती की गई है। बड़ी संख्या में पुलिस बल, महिला कांस्टेबल, होमगार्ड और पीआरडी जवानों के साथ पीएसी, एटीएस, बीडीएस, एसडीआरएफ और फायर सर्विस की टीमें भी सक्रिय रहेंगी, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। स्वास्थ्य सुविधाओं को भी सुदृढ़ किया गया है। विभिन्न स्थानों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों, मेडिकल ऑफिसरों और स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की गई है। गंगोत्री, यमुनोत्री और जानकीचट्टी सहित प्रमुख पड़ावों पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। स्क्रीनिंग प्वाइंट्स पर भी मेडिकल टीम दो शिफ्ट में तैनात रहकर यात्रियों की जांच और सहायता करेगी।
यात्रा के शुभारंभ के साथ ही धार्मिक आस्था का अद्भुत दृश्य उस समय देखने को मिला, जब खरशाली स्थित शीतकालीन गद्दी स्थल से मां यमुना की उत्सव डोली यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हुई। समेश्वर देवता की अगुवाई में निकली इस डोली यात्रा के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति और भावनाओं का वातावरण छा गया। ग्रामीणों ने नम आंखों से अपनी आराध्य देवी को विदा किया और ढोल-नगाड़ों, मंत्रोच्चार व जयकारों के बीच यात्रा आगे बढ़ी। मान्यता के अनुसार, शीतकाल में मां यमुना की पूजा खरशाली में होती है, जबकि ग्रीष्मकाल में यमुनोत्री धाम में विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। भैया दूज तक मां यमुना यमुनोत्री धाम में विराजमान रहती हैं और इस दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। परंपरा के अनुसार, स्थानीय ग्रामीण डोली के साथ पैदल यात्रा करते हुए धाम तक जाते हैं, जो आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। इसी क्रम में मुखबा गांव से मां गंगा की भोगमूर्ति की डोली भी गंगोत्री धाम के लिए रवाना हो चुकी है। अभिजीत मुहूर्त में निकली इस डोली यात्रा में आर्मी बैंड और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों के बीच श्रद्धालुओं ने भावुक होकर मां गंगा को विदा किया। अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे, जिसके साथ ही चारधाम यात्रा पूरी तरह से गति पकड़ लेगी।
प्रशासन और मंदिर समितियों ने यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और सुव्यवस्थित दर्शन के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए हैं। आने वाले दिनों में दोनों धामों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है, जिसके मद्देनजर सभी विभाग सतर्क और तैयार हैं।






