
पूर्वोत्तर राज्य असम के डिब्रूगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मोरन बाईपास पर इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का उद्घाटन किया गया। इसी के साथ पहली बार किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रधानमंत्री के विमान की लैंडिंग कराई गई, जिसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
चीन सीमा के निकट स्थित इस क्षेत्र में देश की सामरिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में यह बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री विशेष विमान से इस आपात लैंडिंग पट्टी पर उतरे, जिसके बाद यह हाईवे स्ट्रिप भारतीय वायुसेना के रणनीतिक नेटवर्क का हिस्सा बन गई। कार्यक्रम के दौरान लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलीकॉप्टरों का हवाई प्रदर्शन भी किया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने देखा।
ईएलएफ क्यों है महत्वपूर्ण
इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी यानी ELF युद्ध या आपात स्थिति में वैकल्पिक रनवे का काम करती है। हाईवे पर विशेष रूप से तैयार की गई यह पट्टी संकट के समय लड़ाकू विमानों, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों की सुरक्षित लैंडिंग और टेक-ऑफ सुनिश्चित करती है। यह सुविधा लगभग 40 टन तक के फाइटर विमान और 74 टन तक के अधिकतम टेक-ऑफ वजन वाले परिवहन विमान संभालने में सक्षम बताई गई है।
सरकार देशभर में कुल 28 ऐसी सुविधाएँ विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। फिलहाल असम के अलावा देश में पाँच स्थानों पर यह व्यवस्था मौजूद है, जो सामरिक दृष्टि से अहम मानी जाती है—
• बाड़मेर (NH-925A)
• आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे
• पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
• बालासोर (NH-16)
• नेल्लोर (NH-16)
असम में यह सुविधा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चीन सीमा के निकट स्थित है, जिससे आपात परिस्थितियों में तेज सैन्य प्रतिक्रिया संभव हो सकेगी।




