
अंतरराष्ट्रीय संबंधों में राष्ट्र हित को सर्वोच्च प्राथमिकता
आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने प्रचंड बहुमत हासिल कर सत्ता में जोरदार वापसी की है। इस परिणाम के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आई तल्खी के बीच अब नई सरकार की विदेश नीति पर सबकी नजर है। भावी प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार देश और जनता के हितों को केंद्र में रखकर विदेश नीति तैयार करेगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जीत को लोकतंत्र की विजय बताते हुए कहा कि यह सफलता उन लोगों की है जिन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष और बलिदान दिया।
भारत के साथ संबंधों पर क्या बोले रहमान
12 फरवरी को हुए राष्ट्रीय चुनावों में भारी जीत के बाद पहली प्रेस वार्ता में जब उनसे भारत के साथ संबंधों को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि बांग्लादेश अपने सभी अंतरराष्ट्रीय संबंधों में राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा। उन्होंने दोहराया कि विदेश नीति का मूल सिद्धांत बांग्लादेश और उसके नागरिकों के हितों की रक्षा होगा। इसी आधार पर अन्य देशों के साथ संबंधों की दिशा तय की जाएगी। रहमान ने कहा कि विचारों में भिन्नता हो सकती है, लेकिन देश के हित में सभी को एकजुट रहना चाहिए। उनके अनुसार राष्ट्रीय एकता सामूहिक ताकत है, जबकि विभाजन कमजोरी का संकेत देता है। उन्होंने चुनाव के बाद सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए एकजुटता को आवश्यक बताया।
दो दशक बाद सत्ता में वापसी
बीएनपी ने दो-तिहाई बहुमत के साथ लगभग 20 वर्षों बाद सत्ता हासिल की है। इस ऐतिहासिक जीत से पहले 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के कारण शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी, जिसके बाद देश में कई महीनों तक राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता बनी रही। जुलाई 2024 में हुए जनआंदोलन के बाद यह पहला आम चुनाव था, इसलिए इसे देश के राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक माना जा रहा था। सत्ता से हटने के बाद शेख हसीना भारत चली गई थीं और उनकी पार्टी अवामी लीग को चुनाव में भाग लेने की अनुमति नहीं मिली।
जनता को दिया धन्यवाद
रहमान ने मतदाताओं को बधाई देते हुए कहा कि तमाम बाधाओं के बावजूद जनता ने लोकतंत्र की राह मजबूत की है। लगभग 17 साल के स्वैच्छिक निर्वासन के बाद वे दिसंबर 2025 में ढाका लौटे थे। वापसी के कुछ समय बाद ही उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन हो गया। अब वे देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, यह पद पहले उनकी मां के पास रह चुका है और 1991 के बाद वे पहले पुरुष प्रधानमंत्री होंगे।






