
शरीर पर सिगरेट से दागने और डंडों से पीटने के निशान, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका
लखनऊ के एक गुरुकुल में पढ़ने गए 11 वर्षीय छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने इसे हत्या करार देते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि गुरुकुल संचालक बच्चे का शव घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया। मासूम के शरीर पर सिगरेट से दागने और डंडों से पीटने के करीब 40–45 निशान पाए गए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। जानकारी के अनुसार, कानपुर के महाराजपुर थाना क्षेत्र के गैरिया गांव निवासी 11 वर्षीय दिव्यांश को परिजन सात दिन पहले लखनऊ के आलमनगर स्थित एक गुरुकुल में पढ़ने के लिए छोड़कर आए थे। परिजनों का कहना है कि उनसे रोजाना बच्चे की बातचीत हो रही थी और मंगलवार सुबह भी उसने अपनी बहन से बात की थी। बुधवार सुबह अचानक एक रिश्तेदार ने फोन कर बताया कि दिव्यांश सीढ़ियों से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया है। परिवार लखनऊ जाने की तैयारी कर ही रहा था कि सुबह करीब साढ़े नौ बजे गुरुकुल संचालक कन्हैया लाल मिश्रा कार से बच्चे का शव लेकर गांव पहुंचा और घर से कुछ दूरी पर छोड़कर फरार हो गया। परिजनों ने जब शव देखा तो उनके होश उड़ गए। शरीर पर कई जगह गहरे चोट के निशान थे। परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्चे को सिगरेट से दागा गया और बुरी तरह पीटा गया। साथ ही हाथ-पैर बांधकर प्रताड़ित किए जाने की भी आशंका जताई गई है।
पिता नरेंद्र द्विवेदी की तहरीर पर पुलिस ने गुरुकुल संचालक कन्हैया लाल मिश्रा और एक अज्ञात चालक के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर लखनऊ, फतेहपुर और बाराबंकी में दबिश दी जा रही है। घटना के बाद गांव में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। बड़ी संख्या में लोग पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। महिलाओं ने भी घटना को लेकर कड़ी नाराजगी जताई।
पुलिस अधिकारियों ने गांव का दौरा कर हालात का जायजा लिया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। एसीपी ने बताया कि पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से कराया जाएगा और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी होगी। परिजनों के मुताबिक दिव्यांश पढ़ाई में तेज था और वैदिक मंत्रों का अच्छा ज्ञान रखता था। उसकी असमय मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। पिता ने कहा कि बेटे को बेहतर और मुफ्त शिक्षा दिलाने के लिए गुरुकुल भेजा था, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वह कभी वापस नहीं लौटेगा।






