मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। ‘मामा’ के नाम से लोकप्रिय शिवराज को आरएसएस का समर्थन प्राप्त है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनकी राजनीतिक अहमियत को भली-भाँति जानते हैं। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों ने उनकी दावेदारी और मजबूत कर दी है।
भाजपा को सितंबर में नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने वाला है। इसके लिए कई नाम चर्चा में हैं, जिनमें शिवराज सिंह चौहान सबसे प्रमुख हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा अध्यक्ष वही बनेगा, जिस पर प्रधानमंत्री का भरोसा हो और जो संघ की भी पसंद हो, साथ ही संगठन व चुनाव प्रबंधन का अनुभव रखता हो। इन सभी मानकों पर शिवराज खरे उतरते हैं। हाल ही में ग्वालियर में उनकी संघ प्रमुख मोहन भागवत से बंद कमरे में हुई मुलाकात ने अटकलों को और बल दिया है। हालांकि, भाजपा अपने अप्रत्याशित फैसलों के लिए जानी जाती है, इसलिए अंतिम नाम का खुलासा कुछ ही दिनों में होगा।
ओबीसी वर्ग से आने वाले शिवराज सिंह संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। युवा मोर्चा से शुरुआत कर उन्होंने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तक का सफर तय किया है। उनकी छवि सरल, सहज और सर्वसुलभ नेता की है। कार्यकर्ताओं और आम जनता से उनका सीधा जुड़ाव उन्हें अन्य नेताओं से अलग करता है। मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज ने लाडली लक्ष्मी और लाडली बहना जैसी योजनाओं से ग्रामीण और महिला वोटबैंक को मज़बूत किया। यही कारण है कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी जनता का भरोसा हासिल है। राजनीतिक जीवन में शिवराज सिंह ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, डंपर कांड और व्यापमं जैसे आरोपों के बावजूद उनकी छवि अपेक्षाकृत साफ रही। वे 18 साल से अधिक समय तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, कई बार सांसद चुने गए और हाल ही में केंद्रीय मंत्री बने हैं।
केंद्र सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में उन्हें पाँचवें नंबर पर शपथ दिलाई गई थी, जो उनके महत्व को दर्शाता है। मोदी, शाह और नड्डा के बाद अब शिवराज ही ऐसे वरिष्ठ नेता हैं, जिन्होंने अब तक भाजपा अध्यक्ष का पद नहीं संभाला है। शिवराज सिंह चौहान का राजनीतिक अनुभव, जनस्वीकार्य छवि और संघ के साथ करीबी संबंध उन्हें भाजपा अध्यक्ष पद के सबसे मज़बूत दावेदारों में खड़ा करते हैं।
शिवराज सिंह चौहान बन सकते हैं भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष, संघ की भी पसंद



