नई दिल्ली में बुधवार को हुई जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर सहमति बनी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में यह तय हुआ कि अब जीएसटी के केवल दो मुख्य स्लैब रहेंगे 5% और 18%। इसके साथ ही 12% और 28% वाले स्लैब खत्म कर दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि नए बदलाव 22 सितंबर 2025 से लागू होंगे। इस फैसले के बाद ज्यादातर सामान इन दो स्लैब के दायरे में आ जाएंगे, जिससे कई वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी। हालांकि, विलासिता और हानिकारक वस्तुओं के लिए अलग से 40% का विशेष स्लैब रखा गया है।
22 सितंबर से सस्ते होंगे कई सामान
बैठक के बाद यूपी के वित्त मंत्री ने बताया कि 22 सितंबर से नए टैक्स ढांचे के लागू होने पर कई चीजों की कीमतें घटेंगी। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त को जीएसटी सुधारों का ऐलान किया गया था, जिसके बाद यह पहली काउंसिल बैठक थी, जहां बड़े फैसले लिए गए। काउंसिल के नए प्रस्तावों के अनुसार, जीएसटी के चार स्लैब घटाकर दो कर दिए गए हैं। 12% वाले स्लैब में शामिल अधिकांश (करीब 99%) सामान अब 5% में आ जाएंगे, जबकि 28% स्लैब के उत्पाद 18% श्रेणी में समाहित होंगे। हिमाचल प्रदेश के मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि सभी सदस्यों ने टैक्स दरों को युक्तिसंगत बनाने पर सहमति जताई है।
टैक्सपेयर्स और कारोबारियों को राहत
काउंसिल टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए नए उपायों पर भी विचार कर रही है। बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी दरें हटाई गई हैं, जिससे स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसी लेना सस्ता होगा। साथ ही, कुछ जीवनरक्षक दवाओं पर भी टैक्स में राहत की संभावना है।
एमएसएमई और स्टार्टअप्स को फायदा
बैठक में छोटे कारोबारियों और स्टार्टअप्स को सहूलियत देने के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान की गई है। अब रजिस्ट्रेशन तीन दिनों में पूरा होगा, जबकि अभी इसमें 30 दिन तक लग जाते हैं। इसके अलावा, कपड़ा, फार्मा, रसायन, उर्वरक जैसे उद्योगों के लिए उल्टे शुल्क ढांचे के तहत अटके रिफंड सात दिन में निपटाने पर भी सहमति बनी है।
लग्जरी इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स बढ़ा
सूत्रों के मुताबिक, ₹20 लाख से अधिक कीमत वाले लग्जरी इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी दर 5% से बढ़ाकर 18% करने का प्रस्ताव है। इससे टाटा मोटर्स, महिंद्रा, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज-बेंज और टेस्ला जैसी कंपनियों पर असर पड़ सकता है।
राजस्व नुकसान की भरपाई की मांग
हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक ने केंद्र से मांग की है कि अगर टैक्स ढांचे को सरल बनाने का प्रस्ताव पास होता है, तो उन्हें होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई की जाए।






