
अमेरिका की ऑगस्टा यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च में सामने आया है कि विटामिन D उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है। रोजाना 2000 IU विटामिन D लेने से टेलोमियर्स सुरक्षित रहते हैं। ये टेलोमियर्स डीएनए की सुरक्षा करते हैं और कैंसर व हृदय रोगों से बचाव में मददगार हो सकते हैं। संतुलित आहार, व्यायाम और पर्याप्त नींद स्वस्थ बुढ़ापे के लिए जरूरी बताए गए हैं।
विटामिन D और टेलोमियर्स का संबंध
विटामिन D जिसे “सनशाइन विटामिन” कहा जाता है, हड्डियों को मजबूत करने और इम्यून सिस्टम को दुरुस्त रखने के लिए जरूरी है। शोध में पाया गया कि यह बुढ़ापे को भी धीमा कर सकता है। हमारे शरीर में 46 क्रोमोसोम्स होते हैं और उनके सिरों पर टेलोमियर्स नामक संरचनाएँ मौजूद रहती हैं। ये टेलोमियर्स डीएनए को टूट-फूट से बचाते हैं। हर बार जब कोशिकाएँ विभाजित होती हैं, तो ये छोटे होते जाते हैं। बहुत ज्यादा छोटे होने पर कोशिकाएँ मरने लगती हैं, जिससे कैंसर, हृदय रोग और गठिया जैसी उम्र-संबंधी बीमारियाँ बढ़ती हैं। धूम्रपान, तनाव और सूजन टेलोमियर्स को और तेजी से छोटा करते हैं। लेकिन विटामिन D इन्हें सुरक्षित रखकर कोशिकाओं को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।
क्या पता चला रिसर्च से
इस अध्ययन में 65 वर्ष औसत उम्र वाले 1031 लोगों को पाँच साल तक शामिल किया गया। आधे लोगों को रोजाना 2000 IU विटामिन D दिया गया, जबकि बाकी को प्लेसिबो। परिणाम चौंकाने वाले थे—विटामिन D लेने वालों में टेलोमियर्स 140 बेस पेयर्स तक अधिक सुरक्षित रहे, जबकि प्लेसिबो समूह में ऐसा नहीं हुआ। सामान्यतः 10 साल में टेलोमियर्स लगभग 460 बेस पेयर्स छोटे हो जाते हैं। इससे संकेत मिलता है कि विटामिन D वास्तव में उम्र की गति को धीमा कर सकता है।
सिर्फ हड्डियों तक सीमित नहीं है विटामिन D
विटामिन D हड्डियों के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता है। यह सर्दी-जुकाम और श्वसन रोगों को कम कर सकता है, खासकर उन लोगों में जिनमें इसकी कमी हो। शुरुआती रिसर्च बताती है कि यह रूमेटाइड गठिया, ल्यूपस और मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों से भी बचाव कर सकता है। विटामिन D सूजन कम करके टेलोमियर्स को सुरक्षित रखता है, जो बुढ़ापे से जुड़ी बीमारियों को रोकने में अहम है।
खुराक और सावधानियाँ
हालाँकि, इसका एक पहलू यह भी है कि बहुत लंबे टेलोमियर्स कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए इनकी लंबाई का संतुलन आवश्यक है। इसके अलावा, विटामिन D की सही खुराक को लेकर अभी एकमत राय नहीं है। इस स्टडी में 2000 IU रोज दी गई, जबकि सामान्य सलाह अक्सर 400 IU होती है। खुराक व्यक्ति की सेहत, खान-पान और मौजूदा स्तर पर निर्भर करती है। अधिक मात्रा में विटामिन D लेने से किडनी स्टोन और कैल्शियम जमाव जैसी समस्याएँ भी हो सकती हैं। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के अतिरिक्त खुराक लेना ठीक नहीं।
यह अध्ययन बुढ़ापे को समझने की नई दिशा देता है। विटामिन D टेलोमियर्स को बचाकर उम्र से जुड़ी बीमारियों को देर तक टाल सकता है। फिर भी, इसकी सही खुराक और संभावित जोखिमों पर और रिसर्च की जरूरत है। तब तक संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनावमुक्त जीवन ही स्वस्थ और लंबे जीवन का सबसे कारगर तरीका है।





