केरल के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी निपाह के दो संदिग्ध मामलों की पुष्टि हुई

निपाह के इस वायरस से 70% रोगियों की हो जाती है मौत

निपाह वायरस एक गंभीर जूनोटिक बीमारी है, जो तेज़ी से फैलने के साथ-साथ संक्रमित व्यक्ति के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नज़र डालें तो स्पष्ट होता है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में संक्रामक रोगों के मामलों में तेजी आई है। चाहे फ्लू का संक्रमण हो या ब्रेन-ईटिंग अमीबा के मामले, बीते वर्ष कई तरह की बीमारियां लगातार चर्चा में रहीं। जुलाई-अगस्त 2025 के दौरान दक्षिणी राज्य केरल में निपाह वायरस के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को चुनौती दी थी। इसी क्रम में अब पश्चिम बंगाल में भी निपाह संक्रमण की पुष्टि होने से स्वास्थ्य विशेषज्ञ सतर्क हो गए हैं।
ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामलों की पुष्टि हुई है। इसके बाद केंद्र सरकार ने तत्काल एक संयुक्त टीम राज्य में भेजी है। यह टीम राज्य सरकार के साथ मिलकर निगरानी, सैंपल जांच, संक्रमण की रोकथाम और केस मैनेजमेंट में सहयोग करेगी। निपाह संक्रमण को अत्यंत घातक माना जाता है। पश्चिम बंगाल से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों संक्रमित एक निजी अस्पताल के मेडिकल स्टाफ से जुड़े हैं और उनकी उम्र 22 से 25 वर्ष के बीच बताई जा रही है। मुख्य सचिव ने जानकारी दी कि स्वास्थ्य विभाग ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि संक्रमण का स्रोत क्या रहा और किन-किन लोगों का संपर्क इन दोनों से हुआ था। स्वास्थ्य मंत्रालय ने निपाह वायरस को लेकर पहले से जारी दिशा-निर्देशों को दोहराते हुए पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।
निपाह वायरस क्या है?
निपाह वायरस एक जूनोटिक रोग है, जो तेज़ी से फैलता है और इसमें मृत्यु का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहता है। जूनोटिक रोग वे संक्रामक बीमारियां होती हैं, जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं। ये वायरस, बैक्टीरिया, परजीवी या फंगस जैसे सूक्ष्मजीवों के कारण हो सकती हैं। निपाह वायरस का संक्रमण मुख्य रूप से चमगादड़ों के संपर्क से फैलता है। कुछ मामलों में सुअर, बकरी और घोड़े जैसे अन्य जानवरों के माध्यम से भी इसका संक्रमण देखा गया है। संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने वाले लोगों में इस बीमारी का खतरा अधिक रहता है। जानवरों के शारीरिक तरल पदार्थ—जैसे रक्त, मल, मूत्र या लार—के संपर्क से यह वायरस इंसानों में प्रवेश कर सकता है। इसके अलावा, यह संक्रमण व्यक्ति से व्यक्ति में भी तेजी से फैल सकता है, जिससे कम समय में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो सकते हैं। निपाह वायरस का मृत्युदर 40 से 75 प्रतिशत के बीच बताया गया है।
एन्सेफलाइटिस का खतरा
निपाह वायरस को खतरनाक इसलिए भी माना जाता है क्योंकि इससे मस्तिष्क में गंभीर सूजन, यानी एन्सेफलाइटिस का खतरा रहता है। इसके चलते तेज बुखार, सिरदर्द, भ्रम की स्थिति, दौरे पड़ना और गंभीर न्यूरोलॉजिकल क्षति तक हो सकती है। यही वजह है कि संक्रमित व्यक्ति को समय पर इलाज उपलब्ध कराना बेहद जरूरी होता है। शुरुआती चरण में निपाह संक्रमण के लक्षण फ्लू जैसे दिखाई देते हैं। इनमें खांसी, गले में खराश, तेज़ सांस लेना, बुखार, मतली और उल्टी जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं शामिल हो सकती हैं। गंभीर मामलों में यह वायरस फेफड़ों और मस्तिष्क पर भी असर डाल सकता है।

नोट: उपरोक्त लेख में वर्णित बीमारी से संबंधित अधिक जानकारी और उपचार के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

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