सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित आरएएस हनुमानाराम की जमानत याचिका खारिज की

सरकार ने कहा, ऐसा व्यक्ति प्रशासनिक सेवा में रहता, तो राजस्थान को बेच देता

सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित आरएएस अधिकारी हनुमानाराम की जमानत याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी भी प्रकार की राहत देना उचित नहीं है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने राज्य सरकार के तर्कों को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि आरोपों की प्रकृति अत्यंत गंभीर है और यह लोक प्रशासन की विश्वसनीयता पर सीधा आघात करता है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि इस प्रकार का व्यक्ति प्रशासनिक सेवा में बना रहता, तो वह व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता था। सरकार ने यह भी दलील दी कि आरोपी की गतिविधियां न केवल प्रशासनिक ढांचे को कमजोर करती हैं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करती हैं, इसलिए उसे जमानत देना उचित नहीं होगा। अदालत ने भी इस बात पर सहमति जताई कि यह कोई एक बार की घटना नहीं है, बल्कि आरोपी के लगातार संदिग्ध आचरण का हिस्सा है। आरोप है कि उसने तीन अलग-अलग अभ्यर्थियों के लिए डमी उम्मीदवार के रूप में परीक्षा दी। राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल एसडी संजय और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने बताया कि आरोपी ने सब-इंस्पेक्टर भर्ती-2021 और पटवारी भर्ती परीक्षा-2021 के विभिन्न चरणों में फर्जी अभ्यर्थी बनकर हिस्सा लिया था।

गौरतलब है कि हनुमानाराम विरड़ा ने आरएएस परीक्षा 2021 में 22वीं रैंक हासिल कर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की थी। इससे पहले वह वर्ष 2018 में सांख्यिकी विभाग में चयनित हो चुका था और इसके बाद भी उसने आरएएस की तैयारी जारी रखी। चयन के बाद उसकी पहली नियुक्ति जालोर जिले के चितलवाना में एसडीएम के रूप में हुई थी, जिसके बाद वह बागोड़ा, शिव और हाल ही में फतेहगढ़ में पदस्थ रहा। इस मामले ने राजस्थान की प्रशासनिक सेवाओं की साख पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। एक अधिकारी का इस प्रकार के फर्जीवाड़े में संलिप्त होना न केवल व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है, बल्कि उन हजारों अभ्यर्थियों के साथ भी अन्याय है जो ईमानदारी से परीक्षाओं में शामिल होते हैं।

हनुमानाराम बिरड़ा बाड़मेर जिले के बिसारणियां गांव का निवासी है। उसके परिवार में माता-पिता के अलावा दो भाई और छह बहनें हैं। उसके पिता और भाई कृषि कार्य से जुड़े हैं। बचपन से मेधावी रहे हनुमानाराम ने वर्ष 2016 से आरएएस की तैयारी शुरू की थी और 2018 में सांख्यिकी विभाग में चयनित होने के बावजूद अपनी तैयारी जारी रखी। दूसरे प्रयास में ही उसे आरएएस में सफलता मिल गई थी। मामले में यह भी सामने आया है कि जैसलमेर के फतेहगढ़ में एसडीएम पद पर तैनात रहते हुए उसने एसआई भर्ती परीक्षा 2021 में नरपतराम नामक अभ्यर्थी के स्थान पर डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा दी थी। इस प्रकरण में नरपतराम और उसकी पत्नी इंद्रा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इंद्रा पर भी आरोप है कि उसने एक अन्य उम्मीदवार हरखू जाट की जगह परीक्षा दी थी। उल्लेखनीय है कि इंद्रा ने अपनी स्वयं की परीक्षा भी दी थी, जिसमें वह असफल रही, जबकि हरखू जाट उत्तीर्ण हो गया।

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