अखिलेश यादव ने कहा, मुस्लिम महिलाओं को भी मिले आरक्षण

धर्म के आधार पर आरक्षण देना पूरी तरह से असंवैधानिक है– अमित शाह

संसद में महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन विधेयकों पर आज जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला। सरकार द्वारा पेश किए गए तीन अहम बिलों पर सदन में तीखी बहस छिड़ गई, जिसमें विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज करते हुए सरकार पर संविधान के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया। बहस की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार के कदम को संविधान के लिए खतरा बताते हुए कहा कि यह प्रयास संविधान को ‘हाइजैक’ करने जैसा है। उनके बयान के बाद सदन का माहौल और अधिक गरम हो गया। इसके बाद समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है, तो इस कानून की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े होंगे। विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना पूरी तरह असंवैधानिक है और इस तरह की मांग पर विचार नहीं किया जा सकता। इस पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को आरक्षण देने पर व्यापक सहमति है, लेकिन मुस्लिम महिलाओं को लेकर सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि समाजवादी पार्टी चाहे तो वह अपने सभी चुनावी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है, सरकार को इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी।

महिला आरक्षण विधेयक की प्रमुख बातें

  • प्रस्ताव के तहत लोकसभा में सांसदों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने की बात कही गई है।
  • राज्यों के लिए कुल 815 सीटों का प्रावधान किया गया है।
  • केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें निर्धारित की गई हैं।
  • सीटों का अंतिम निर्धारण परिसीमन प्रक्रिया के बाद किया जाएगा।
  • कुल 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है।

बिल की अहमियत और विवाद
महिला आरक्षण से जुड़ा यह प्रस्ताव महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हालांकि, इस पर राजनीतिक सहमति बनती नजर नहीं आ रही है। जहां सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसमें कई खामियां गिनाते हुए इसे लेकर सवाल उठा रहा है।

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading