अब से सरकारी वाहनों की नीलामी के बाद खरीदारों को अनिवार्य रूप से नया पंजीकरण नंबर लेना होगा। ‘जी’ सीरीज के नंबर निजी वाहनों से पूरी तरह हटाए जाएंगे क्योंकि यह सीरीज केवल राजकीय वाहनों के लिए आरक्षित है। जिन निजी वाहनों को पहले से ‘जी’ सीरीज का नंबर आवंटित किया गया है, उनके स्वामियों को 60 दिनों के भीतर नया नंबर लेना होगा। निर्धारित समय सीमा में नंबर न बदलने पर आरसी निलंबन सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य बिंदु:
- खरीदारों को अब ‘जी’ सीरीज का नंबर नहीं मिलेगा।
- जिन वाहनों को ‘जी’ सीरीज पहले ही आवंटित है, उन्हें 60 दिन में नया नंबर लेना होगा।
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि नीलामी या हस्तांतरण के बाद जैसे ही कोई वाहन निजी स्वामित्व में आएगा, ‘जी’ नंबर स्वतः अमान्य हो जाएगा और वाहन स्वामी को निजी पंजीकरण नंबर लेना अनिवार्य होगा। इसके तहत नया पंजीकरण प्रमाणपत्र और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) जारी की जाएगी। निजी स्वामियों को एआरटीओ कार्यालय जाकर नया नंबर लेना होगा। सुविधा के लिए जहां संभव होगा, पुराने नंबर के अंतिम चार अंक नए नंबर में दिए जाएंगे। इस प्रक्रिया में केवल पुनः आरसी प्रिंट और एचएसआरपी की लागत देनी होगी। यह व्यवस्था मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 41(6), 53, केंद्रीय मोटरयान नियमावली 1989 के नियम 50/55/57 तथा उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली 1998 के नियम 51/51-ए के अनुरूप है। परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने कहा कि ‘जी’ सीरीज का निजी वाहनों पर प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। सभी प्रभावित वाहन स्वामी 60 दिनों के भीतर नया नंबर व एचएसआरपी ले लें, क्योंकि विलंब होने पर विभाग कानूनी कार्रवाई करेगा।
यह बदलाव क्यों आवश्यक है:
- पंजीकरण प्रमाणपत्र, एचएसआरपी और नंबर-डेटा की सटीकता से चालान व टोल सिस्टम सुचारु रहता है।
- . ‘जी’ सीरीज केवल राजकीय स्वामित्व वाले वाहनों तक सीमित है, निजी स्वामित्व में इसका प्रयोग नियमविरुद्ध है।
- यह सरकारी पहचान है, जिसका निजी वाहनों पर बने रहने से टोल, प्रवेश-नियंत्रण आदि में भ्रम व दुरुपयोग का खतरा रहता है।





