गोरखपुर एयरपोर्ट से 24 घंटे उड़ान का प्रस्ताव, नई उड़ानें शुरू करने पर भी जोर

एयरपोर्ट का नाम महायोगी गुरु गोरखनाथ रखने पर बनी सहमति, लगेगी प्रतिमा

गोरखपुर। एयरपोर्ट सलाहकार समिति की सोमवार को हुई बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में गोरखपुर से 24 घंटे उड़ान सेवा शुरू करने, नए शहरों को हवाई मार्ग से जोड़ने, एयरपोर्ट परिसर में गुरु गोरखनाथ की प्रतिमा लगाने और एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर रखने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ।

बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद रवि किशन शुक्ल ने कहा कि गोरखपुर एयरपोर्ट को 24 घंटे संचालन योग्य बनाने के लिए भारतीय वायुसेना से अनुमति ली जाएगी और आवश्यक संसाधन जुटाए जाएंगे। उनके अनुसार, चौबीसों घंटे उड़ानें शुरू होने से यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी और एयरपोर्ट नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। उन्होंने यह भी कहा कि गोरखपुर से जम्मू, पुणे, जयपुर, चंडीगढ़ और गोवा के लिए सीधी उड़ानें शुरू की जानी चाहिए। इससे न केवल यात्रियों को लाभ होगा बल्कि पूर्वांचल का सीधा संपर्क देश के प्रमुख शहरों से स्थापित होगा। एयरपोर्ट की तकनीकी क्षमताओं को और सशक्त बनाने के लिए यंत्र आधारित अवतरण प्रणाली (आईएलएस) को श्रेणी-दो स्तर तक उन्नत करने पर चर्चा की गई। इसके लागू होने से खराब मौसम और कम दृश्यता की स्थिति में भी विमान संचालन संभव हो सकेगा। साथ ही एप्रन विस्तार कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करने और यात्रियों की सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया गया।
समिति के सदस्यों ने कई प्रस्ताव रखे, जिनमें हवाई अड्डा परिसर में गीता प्रेस की दुकान खोलना, मुख्य द्वार का सौंदर्यीकरण करना, राजमार्ग पर यात्री शेड और पेयजल की व्यवस्था करना, बड़े एलईडी स्क्रीन पर एयरपोर्ट का नाम प्रदर्शित करना और समिति के सभी सदस्यों को वाहन प्रवेश पास जारी करना शामिल है। सभी सदस्यों ने मिलकर यह भी प्रस्ताव पारित किया कि हवाई अड्डा परिसर में गुरु गोरक्षनाथ की प्रतिमा स्थापित की जाए और एयरपोर्ट का नाम बदलकर महायोगी गुरु गोरखनाथ हवाई अड्डा किया जाए। इस बैठक में समिति सदस्य मनीष सिंह, आलोक अग्रवाल, शांतनु सर्राफ, अपर जिलाधिकारी नगर, एयरपोर्ट निदेशक आर.के. पाराशर, सहायक महाप्रबंधक (संचार) विजय कौशल, हवाई अड्डा सुरक्षा अधिकारी विनोद कुमार सिंह तथा अकासा, इंडिगो, स्पाइसजेट और अलायंस एयर के अधिकारी मौजूद रहे।

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading