28 सितंबर: विश्व रेबीज दिवस

कुत्ते के काटने पर कितने दिनों के अंदर लगवा सकते हैं एंटी रेबीज इंजेक्शन, देरी होने पर जा सकती है जान

क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटे से कुत्ते का काटना भी कितना खतरनाक साबित हो सकता है? अक्सर लोग इसे हल्के में ले लेते हैं, लेकिन यही लापरवाही जानलेवा रूप ले सकती है। हम बात कर रहे हैं रेबीज की एक ऐसी बीमारी जिसका नाम सुनते ही डर पैदा हो जाता है। लेकिन चिंता की कोई बात नहीं, सही जानकारी और समय पर इलाज से इस बीमारी को आसानी से रोका जा सकता है।

रेबीज क्या है और यह कैसे फैलता है?
रेबीज एक घातक संक्रामक रोग है, जो लायसावायरस परिवार के वायरस से होता है। यह वायरस संक्रमित जानवरों की लार में पाया जाता है और काटने पर सीधा शरीर में प्रवेश कर जाता है। यह सिर्फ कुत्तों से ही नहीं, बल्कि बिल्लियों, बंदरों, चमगादड़ों और अन्य जंगली जानवरों से भी फैल सकता है। वायरस धीरे-धीरे रीढ़ की हड्डी के रास्ते मस्तिष्क तक पहुंचता है। इस प्रक्रिया को ऊष्मायन अवधि कहते हैं, जो सामान्यतः 3 से 12 सप्ताह तक की होती है, लेकिन कभी-कभी सालों भी लग सकते हैं। इस दौरान कोई लक्षण नहीं दिखते, मगर एक बार मस्तिष्क तक पहुंचने के बाद स्थिति तेजी से गंभीर हो जाती है।

सावधान! सिर्फ काटने से नहीं, खरोंच से भी फैलता है रेबीज
अधिकतर लोग मानते हैं कि रेबीज सिर्फ गहरे घाव से फैलता है, जबकि सच यह है कि यह वायरस छोटे से खरोंच या खुले घाव से भी शरीर में घुस सकता है। इतना ही नहीं, आंख, नाक या मुंह की नमी वाली झिल्लियों के संपर्क में आने से भी संक्रमण फैल सकता है।

इंसानों में रेबीज के लक्षण
• तेज बुखार, कमजोरी और सिरदर्द
• घबराहट, उल्टी
• गले की मांसपेशियों का लकवा, जिससे पानी पीना मुश्किल हो जाता है
• पानी से डर लगना (हाइड्रोफोबिया)
• हवा से डर लगना (एयरोफोबिया)
• मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफलाइटिस)
• लकवा और अंततः कोमा

पालतू जानवरों में रेबीज के लक्षण
• अत्यधिक लार आना
• सुस्ती या बीमारी जैसा व्यवहार
• अचानक आक्रामक होना
• निगलने में कठिनाई
• पैरालिसिस

इलाज: 72 घंटे का ‘गोल्डन पीरियड’
अगर किसी आवारा या पालतू जानवर ने काट लिया है, तो तुरंत एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना बेहद जरूरी है। जानवर के काटने के 72 घंटे (3 दिन) के भीतर इंजेक्शन लगवाना सबसे अधिक असरदार रहता है। ज्यादा देर होने पर वैक्सीन का प्रभाव घट जाता है। सबसे पहले मरीज को रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन दिया जाता है, जो तुरंत सुरक्षा देता है। इसके बाद 4 हफ्तों में 5 इंजेक्शन का पूरा कोर्स करना पड़ता है।

14 नहीं, सिर्फ 5 इंजेक्शन ही पर्याप्त
पहले रेबीज के इलाज के लिए 14 से 16 दर्दनाक इंजेक्शन लगाए जाते थे। लेकिन अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की नई गाइडलाइंस के मुताबिक, केवल 5 वैक्सीन डोज ही काफी हैं। ये डोज क्रमशः 1, 3, 7, 14 और 28वें दिन दी जाती हैं। दुर्भाग्य से, बहुत से लोग अभी भी पुरानी जानकारी पर भरोसा करते हैं, जिससे इलाज में देरी हो जाती है। इसलिए सही जानकारी और जागरूकता ही रेबीज से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।

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