जीवनशैली, खानपान और दिमाग को सक्रिय रखने से याददाश्त बनी रहेगी तेज, नहीं भूलेंगे कोई बात

विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित खानपान और दिमाग को सक्रिय बनाए रखने से याददाश्त को लंबे समय तक बेहतर रखा जा सकता है और अल्ज़ाइमर जैसी बीमारियों से बचाव संभव है।
अल्जाइमर: धीरे-धीरे याददाश्त खोने की बीमारी
उम्र बढ़ने के साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं घेरने लगती हैं। कमजोर होती रोग प्रतिरोधक क्षमता जहां संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ाती है, वहीं 50 वर्ष की उम्र के बाद याददाश्त भी कमज़ोर होने लगती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे शरीर बूढ़ा होता है, वैसे ही दिमाग की कोशिकाएं (न्यूरॉन्स) भी कमजोर पड़ने लगती हैं। इसी कारण लोग बार-बार चीजें भूलने लगते हैं, नाम याद नहीं रहते, सामान रखकर भूल जाते हैं या बातचीत के दौरान शब्द भूल जाते हैं। यह सामान्य बढ़ती उम्र की प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन कभी-कभी यह अल्जाइमर रोग की शुरुआत का संकेत भी होता है। जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 21 सितम्बर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि सही जीवनशैली, खानपान और दिमाग को सक्रिय रखने से याददाश्त को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और अल्जाइमर से बचाव भी संभव है।
अल्जाइमर दिमाग की एक गंभीर बीमारी है जिसमें मरीज धीरे-धीरे चीजें भूलने लगता है। शुरुआत में यह भूलना छोटी-छोटी बातों तक सीमित होता है, जैसे किसी का नाम, सामान कहां रखा था या हाल ही की घटनाएं। लेकिन समय के साथ भूलने की आदत इतनी बढ़ जाती है कि मरीज अपने परिवार, जगह या रोजमर्रा के काम तक याद नहीं रख पाता। 65 वर्ष की उम्र के बाद अल्जाइमर और डिमेंशिया का खतरा काफी बढ़ जाता है। भारत में भी इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन जीवनशैली और खानपान में समय रहते बदलाव करके इसके असर को धीमा किया जा सकता है। खासतौर पर माइंड डाइट इसमें बहुत फायदेमंद मानी जाती है। शोधों के अनुसार यह डाइट अल्जाइमर के खतरे को 53% तक कम कर सकती है।
माइंड डाइट: दिमाग के लिए वरदान
विशेषज्ञ बताते हैं कि थाली जितनी रंगीन और पौष्टिक होगी, दिमाग उतना ही स्वस्थ और सक्रिय रहेगा। माइंड डाइट (मेडिटेरेनियन + डैश डाइट) को दिमाग के लिए सबसे बेहतर माना गया है। इसमें शामिल हैं:
• हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी, ब्रोकोली) जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन-के भरपूर होता है।
• ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी, जो दिमागी कोशिकाओं को नुकसान से बचाती हैं और याददाश्त सुधारती हैं।
• अखरोट, अलसी और मछली, जो ओमेगा-3 फैटी एसिड का बेहतरीन स्रोत हैं और ब्रेन सेल्स को मजबूत करते हैं।
• हल्दी का करक्यूमिन, जो दिमाग में सूजन कम करता है और अल्जाइमर के खतरे को घटाता है।
नींद और व्यायाम की अहमियत
अच्छी नींद और नियमित व्यायाम भी दिमाग को स्वस्थ रखते हैं।
• रोजाना 7–8 घंटे की नींद लेने से दिमाग टॉक्सिन्स को साफ करता है और यादों को सुरक्षित रखता है।
• योग, वॉक और साइकलिंग जैसे व्यायाम से दिमाग तक रक्त संचार बढ़ता है, जिससे न्यूरॉन्स को पोषण मिलता है।
• ध्यान और मेडिटेशन तनाव कम करके मस्तिष्क को शांत और सक्रिय बनाए रखते हैं।
भूलने की समस्या से बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि उम्र के साथ भूलना सामान्य है, लेकिन इसे नज़रअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के अनुसार 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, जो हफ्ते में चार दिन व्यायाम करते थे, उनमें डिमेंशिया का खतरा लगभग आधा पाया गया। सही आहार और नियमित आदतें बनाकर अल्जाइमर व अन्य दिमागी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
नोट: संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।






