क्रेन हादसे में महिला की मौत, ट्रिब्यूनल ने परिजनों को ₹35.27 लाख मुआवजा देने का दिया आदेश

मामले की सुनवाई के दौरान मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने स्पष्ट कहा कि कोई भी व्यक्ति तब तक मोबाइल हाइड्रॉलिक क्रेन नहीं चला सकता, जब तक उसके ड्राइविंग लाइसेंस में इस वाहन को चलाने की अनुमति दर्ज न हो। और दुर्घटना के समय चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था।

महाराष्ट्र के ठाणे में एमएसीटी ने 58 वर्षीय महिला की मौत के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए उसके बच्चों को ₹35.27 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया। वर्ष 2017 में यह महिला एक हाइड्रॉलिक क्रेन की चपेट में आ गई थी। न्यायाधिकरण के सदस्य आर. वी. मोहिटे ने अपने आदेश में कहा कि मुआवजे की राशि पहले ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को पीड़िता के परिजनों को देनी होगी। हालांकि, कंपनी यह रकम बाद में वाहन मालिक से वसूल कर सकेगी, क्योंकि दुर्घटना के समय बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन हुआ था।
यह दुर्घटना 20 नवंबर 2017 की सुबह ठाणे के वागले एस्टेट इलाके में हुई थी। पीड़िता शलान सुरेश कांबले, जो कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में चपरासी के पद पर कार्यरत थीं, रोज की तरह पैदल जा रही थीं। तभी तेज रफ्तार में आई एक हाइड्रॉलिक क्रेन ने उन्हें टक्कर मार दी और उन पर से गुजर गई। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां पांच दिन बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। इस हादसे में उनकी कई हड्डियां टूट गई थीं और किडनी को गंभीर क्षति पहुंची थी। पुलिस ने मामले में क्रेन चालक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था।

न्यायाधिकरण का निष्कर्ष और बीमा कंपनी की दलील
ट्रिब्यूनल ने सभी सबूतों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि हादसा पूरी तरह क्रेन चालक की लापरवाही के कारण हुआ था। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि मृतका की ओर से किसी प्रकार की गलती नहीं थी। दूसरी ओर, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने तर्क दिया कि वाहन के मालिक ने बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन किया, क्योंकि चालक के पास क्रेन चलाने का वैध लाइसेंस नहीं था। आरटीओ की रिपोर्ट से भी यह पुष्टि हुई कि चालक के लाइसेंस में क्रेन चलाने की अनुमति दर्ज नहीं थी।

मुआवजा निर्धारण
शलान कांबले की मासिक आय ₹38,822 थी। इसी आधार पर न्यायाधिकरण ने कुल मुआवजा राशि ₹35.27 लाख तय की। इस पर 9% वार्षिक ब्याज भी जोड़ा गया है, जो दावा याचिका दायर करने की तारीख से प्रभावी होगा। बीमा कंपनी को यह पूरी राशि पहले मृतका के बच्चों को देनी होगी और बाद में वह रकम वाहन मालिक से वसूल सकती है।

विशिखा मीडिया

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