देशभर में मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के लिए चुनाव आयोग ने बुधवार को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। दो दिनों तक चलने वाली इस बैठक में पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) को लागू करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हो रही है।
बैठक का उद्देश्य
इस बैठक का मुख्य मकसद आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूचियों को सुधारना और उन्हें अधिक सटीक बनाना है। आयोग के शीर्ष अधिकारियों ने राज्यों के सीईओ से मुलाकात कर देशव्यापी एसआईआर अभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप देने पर विचार-विमर्श किया।
एसआईआर अभियान का लक्ष्य
एसआईआर का प्रमुख उद्देश्य पुराने, दोहराए गए और गलत रिकॉर्ड को हटाकर मतदाता सूची को अद्यतन करना है। इस अभियान में अवैध विदेशी नागरिकों के नामों की पहचान कर उन्हें सूची से हटाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आयोग इस बार यह अभियान चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की योजना बना रहा है।
किन राज्यों में पहले चलेगा अभियान
चुनाव आयोग की योजना है कि एसआईआर की शुरुआत उन राज्यों से की जाए, जहां 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं, जैसे असम, केरल, पुद्दुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल। इनके अलावा कुछ अन्य राज्यों को भी पहले चरण में शामिल किया जा सकता है। वहीं जिन राज्यों में अभी स्थानीय निकाय चुनाव चल रहे हैं या जल्द होने वाले हैं, वहां यह अभियान बाद में शुरू किया जाएगा ताकि स्थानीय चुनावी मशीनरी पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
पुरानी मतदाता सूची बनेगी आधार
हर राज्य में पिछली एसआईआर के रिकॉर्ड को इस बार के अभियान का आधार बनाया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, बिहार में आखिरी एसआईआर 2003 में हुई थी, और वहां हाल ही में 7.42 करोड़ मतदाताओं की अंतिम सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की गई। दिल्ली में 2008 में, जबकि उत्तराखंड में 2006 में आखिरी गहन पुनरीक्षण किया गया था। अधिकांश राज्यों में पिछली एसआईआर 2002 से 2004 के बीच कराई गई थी। अब कई राज्यों ने मौजूदा मतदाताओं का मिलान पुरानी सूचियों से लगभग पूरा कर लिया है।
सीईसी का बयान
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पूरे देश में एसआईआर लागू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आयोग के तीनों आयुक्त जल्द ही राज्यों के लिए अभियान की तारीखें तय करेंगे। सितंबर में ही चुनाव आयोग ने राज्यों को इस प्रक्रिया के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए थे। अब साफ-सुथरी और अद्यतन मतदाता सूची तैयार करने की समयसीमा तय की जाएगी, ताकि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले सभी राज्यों की मतदाता सूचियाँ पूरी तरह अपडेट हो सकें।





