आसिम मुनीर को ज्यादा शक्तियां देने वाले कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के बाद अब हाईकोर्ट के जजों ने भी जताई आपत्ति

पाकिस्तान में फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को अधिक शक्तियां देने वाले संविधान के 27वें संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट के बाद अब देश की हाईकोर्ट के कई जजों ने भी विरोध जताया है। बताया जा रहा है कि इस्लामाबाद हाईकोर्ट के चार जजों ने शहबाज़ शरीफ सरकार द्वारा लाए गए इस संशोधन को चुनौती देने की इच्छा जताई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अनुमति नहीं दी और हाल ही में गठित संघीय संवैधानिक अदालत (एफसीसी) में जाने का निर्देश दिया।

क्या है संविधान का 27वां संशोधन?
लगभग एक सप्ताह पहले पाकिस्तान की संसद के दोनों सदनों से 27वां संशोधन पारित किया गया। इसके तहत देश में ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ नाम का नया पद बनाया गया है। साथ ही फील्ड मार्शल को आजीवन पद पर बने रहने की शक्ति दे दी गई है। इसके अलावा संवैधानिक अदालत की स्थापना का भी प्रावधान संशोधन में शामिल है। इस संशोधन के लागू होने के बाद आसिम मुनीर की शक्तियां काफी बढ़ गई हैं। वे अब जीवनभर फील्ड मार्शल रहेंगे और सेवानिवृत्ति के बाद भी रक्षा मामलों में सरकार के सलाहकार बने रहेंगे। साथ ही उन्हें किसी भी मामले में कानूनी सुरक्षा (इम्यूनिटी) भी प्रदान की गई है।

जजों ने क्यों जताई आपत्ति?
द डॉन अखबार के मुताबिक, इस्लामाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस मोहसिन अख्तर कयानी, जस्टिस बाबर सत्तार, जस्टिस सरदार एजाज इशाक खान और जस्टिस समन रिफत इम्तियाज ने संविधान के अनुच्छेद 184(3) के तहत अपनी आपत्तियां सुप्रीम कोर्ट में दर्ज कराई थीं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार नहीं की, क्योंकि अब इस अनुच्छेद से सर्वोच्च न्यायालय के मौलिक अधिकारों की सुनवाई करने की शक्ति ही हटाई जा चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, ये जज व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश नहीं हुए थे और न ही बायोमेट्रिक सत्यापन कराया गया था। हालांकि, वे लंबे समय से इस संशोधन को न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए खतरा बता रहे थे। उनका कहना है कि पहले 26वें संशोधन से न्यायपालिका की शक्तियां सीमित की गईं और अब 27वां संशोधन उस दिशा में और बड़ा कदम है। सुप्रीम कोर्ट ने अपना क्षेत्राधिकार न बताते हुए जजों को संघीय संवैधानिक अदालत में जाने की सलाह दी, जो ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए बनाई गई है। लेकिन विरोध करने वाले जजों का तर्क है कि एफसीसी खुद उसी संशोधन की उपज है, जिसे वे चुनौती देना चाहते हैं। ऐसे में उसके सामने न्याय मांगना विरोधाभासी है।

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading