
दिल्ली ब्लास्ट की जांच में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। जम्मू मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर चुके कश्मीरी युवाओं को धीरे-धीरे ब्रेनवॉश करके जैश-ए-मोहम्मद के लिए एक सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल तैयार किया गया। इस मॉड्यूल में शामिल अब तक जितने भी डॉक्टरों की पहचान हुई है, वे सभी इसी मेडिकल कॉलेज से पढ़े हुए हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद ये अलग-अलग शहरों में नौकरी करने लगे और वहीं से नए लोगों को भी इस नेटवर्क से जोड़ते रहे। जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए डॉक्टर और उनसे जुड़े लोग किसी न किसी रूप में जम्मू मेडिकल कॉलेज से जुड़े पाए गए हैं। इसी संस्थान से जैश-ए-मोहम्मद ने इस गुप्त मॉड्यूल की नींव रखी थी। आरोप है कि डॉक्टरों का चयन कर उन्हें धीरे-धीरे कट्टर विचारधारा की ओर मोड़ा गया। उन्हें बार-बार ऐसे वीडियो दिखाए गए जिनमें दावा किया गया कि दुनिया भर में एक खास समुदाय पर अत्याचार हो रहा है। कहा गया कि इस स्थिति में “क़ौम के लिए खड़े होना आपका फ़र्ज़ है और इस रास्ते से आप नाम और दर्जा दोनों हासिल कर सकते हैं।” सूत्र बताते हैं कि हर एक या दो डॉक्टर पर एक पाकिस्तानी हैंडलर नियुक्त था। वह नियमित रूप से उनसे वॉयस और वीडियो कॉल पर संपर्क में रहता था। पहले उन्हें धार्मिक और भावनात्मक सामग्री दिखाई जाती और बाद में धीरे-धीरे बम बनाने और धमाका करने से जुड़ी सामग्री भी साझा की जाती थी।
अमोनियम नाइट्रेट की खरीद-बिक्री का रखना होगा डिजिटल रिकॉर्ड
दिल्ली सरकार और पुलिस अब अमोनियम नाइट्रेट की हर खरीद-बिक्री का डिजिटल रिकॉर्ड रखेगी। लाल किले में हुए धमाके के बाद उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने पुलिस कमिश्नर और मुख्य सचिव को निगरानी को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत जो भी व्यक्ति या संस्था निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट खरीदेगी या बेचेगी, उसका विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड बनाया जाएगा। इसमें खरीदार और विक्रेता की पहचान, फोटो, मात्रा और भुगतान से जुड़े विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज होंगे। उपराज्यपाल ने पुलिस को मेटा, एक्स और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों से सीधा संवाद शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन कट्टरपंथी सामग्री आज की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है और इसे रोकने के लिए तकनीकी मॉनिटरिंग और भी मजबूत होनी चाहिए।
एलजी के अनुसार, दिल्ली जैसे अंतरराष्ट्रीय शहर में सुरक्षा के साथ कोई जोखिम नहीं लिया जा सकता। उन्होंने पुलिस को ऐसे इलाकों में निगरानी बढ़ाने के आदेश दिए हैं जहां कट्टरपंथ की आशंका अधिक है। इसके लिए तकनीकी इंटेलिजेंस के साथ-साथ मानवीय खुफिया तंत्र को भी मजबूत किया जाएगा। साथ ही, कम्युनिटी आउटरीच और प्रिवेंटिव पुलिसिंग को भी बढ़ाया जाएगा ताकि आतंकी नेटवर्कों को शुरू होने से पहले ही रोका जा सके।






