न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री सहित कई वरिष्ठ नेता समारोह में उपस्थित रहे।

शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई समेत कई प्रमुख हस्तियाँ मौजूद रहीं।
हरियाणा के एक छोटे से गाँव पेटवाड़ में तपती धूप के बीच गेहूं की मड़ाई कर रहा एक दुबला-पतला किशोर अचानक थ्रेशर रोक देता है। आसमान की ओर देखते हुए वह दृढ़ स्वर में कहता है, “मैं अपनी जिंदगी बदल दूंगा।” उसी सामान्य सरकारी स्कूल के छात्र सूर्यकांत ने आज भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ लेकर उस सपने को हकीकत में बदल दिया। 24 नवंबर 2025 से 9 फरवरी 2027 तक वे लगभग 15 महीनों तक देश की सर्वोच्च अदालत का नेतृत्व करेंगे।
10 फरवरी 1962 को जन्मे न्यायमूर्ति सूर्यकांत, हरियाणा के हिसार जिले के पेटवाड़ गांव से आते हैं। उनके पिता मदनगोपाल शास्त्री संस्कृत शिक्षक थे और मां शशिदेवी एक गृहिणी। पाँच भाई-बहनों में सबसे छोटे सूर्यकांत के भाई ऋषिकांत, शिवकांत और देवकांत तथा बहन कमला देवी हैं। पिता चाहते थे कि वह एलएलएम करें, लेकिन सूर्यकांत ने एलएलबी के बाद सीधा वकालत का रास्ता चुना।

मुख्य मामलों में योगदान

  • बिहार के 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाने के मामले में चुनाव आयोग को विवरण सार्वजनिक करने का आदेश।
  • अनुच्छेद 370 हटाने संबंधी केंद्र सरकार के निर्णय को बरकरार रखने वाली संविधान पीठ का हिस्सा।
  • वन रैंक वन पेंशन (OROP) को संवैधानिक मान्यता और सशस्त्र बलों में महिलाओं को समान अवसर देने का समर्थन।
  • असम नागरिकता विवाद में धारा 6A की वैधता को सही ठहराने वाली पीठ में शामिल।
  • दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को जमानत देने वाली पीठ में शामिल, हालांकि गिरफ्तारी को उचित बताया।

शैक्षणिक और पेशेवर सफर
1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून की डिग्री पूरी कर उन्होंने हिसार जिला अदालत से वकालत शुरू की। 1985 में वे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में आ गए। 2000 में महज 38 वर्ष की उम्र में हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता बने।
इसके बाद वह वरिष्ठ अधिवक्ता नियुक्त हुए और 2004 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने। 2018 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने।

व्यक्तिगत जीवन एवं रुचियाँ
उनकी शादी 1980 में सविता शर्मा से हुई, जो बाद में कॉलेज प्रिंसिपल बनीं। उनकी दो बेटियाँ हैं, जो कानून में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। कानून के अलावा जस्टिस सूर्यकांत कविता, प्रकृति संरक्षण और खेती के भी बेहद शौकीन हैं। उनकी कविता “मेंढ पर मिट्टी चढ़ा दो” कॉलेज समय में काफी प्रसिद्ध हुई थी। उन्होंने Administrative Geography of India नामक पुस्तक भी लिखी है। जस्टिस सूर्यकांत पत्रकारिता से भी बेहद जुड़े रहे हैं, वे खुद कहते हैं कि वह दिल से आज भी पत्रकार हैं।

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