जयपुर। राजस्थान में अब बिना भू-रूपांतरण किए और भू-राजस्व अधिनियम की धारा 90ए के तहत जारी सोसाइटी पट्टों की रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। मंगलवार को राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए रजिस्ट्रेशन एक्ट-2021 के नए प्रावधानों के बाद यह बदलाव प्रभावी हुआ है, जिसकी पंजीयन कार्यालयों ने पालन शुरू भी कर दिया है। बुधवार को इसके असर दिखाई दिए, वहीं पंजीयन से जुड़े वकीलों ने विरोध जताते हुए गुरुवार को जयपुर में काम बंद रखने और कलक्ट्रेट बंद करने का आह्वान किया है। जारी अधिसूचना के अनुसार, यदि बिना भू-रूपांतरण या भू-राजस्व कानून की धारा 90ए के अंतर्गत जारी सोसाइटी पट्टों की रजिस्ट्री में किसी तरह का उल्लंघन पाया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी उप-रजिस्ट्रार की होगी। अब सोसाइटी पट्टों की रजिस्ट्री करवाते समय भूस्वामी को यह बताना अनिवार्य होगा कि जिस प्लॉट का सौदा किया गया है, उसका कन्वर्ज़न हो चुका है या वह धारा 90ए में शामिल है। उप-रजिस्ट्रार कार्यालय इस नियम का कड़ाई से पालन करा रहे हैं।
सरकारी और एससी-एसटी भूमि की बिक्री पर सख्ती
काश्तकारी अधिनियम के मुताबिक, एससी-एसटी श्रेणी की भूमि केवल उन्हीं वर्गों के लोगों द्वारा खरीदी जा सकती है, लेकिन नियमों के विपरीत प्लॉटिंग की शिकायतें सामने आ रही थीं। बताया जा रहा है कि पंजीयन कार्यालयों में होने वाली रजिस्ट्री में लगभग 60 प्रतिशत मामले सोसाइटी पट्टों से जुड़े होते हैं।
बैंकों को भी देनी होगी जानकारी
अब बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भी संपत्ति पर बनाए गए इक्विटेबल मॉर्गेज की प्रति संबंधित पंजीयन कार्यालय को भेजना अनिवार्य होगा। नियम की अनदेखी करने पर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।






