
यूपी में धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया है, जहां एक हिंदू युवक ने इस्लाम धर्म अपना लिया। सोनभद्र के म्योरपुर क्षेत्र का 37 वर्षीय रामशकल अब मो. जहांगीर अशरफ के नाम से जाना जाता है। वह मस्जिद में अजान देता है, नियमित रूप से नमाज अदा करता है और कुरान का अध्ययन करता है।
सोनभद्र जिले में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ वर्ष पहले तक रामशकल के नाम से पहचाने जाने वाले व्यक्ति ने अब मुस्लिम धर्म अपना लिया है। वह मस्जिद जाता है, अजान देता है और नमाज पढ़ता है। उसने एक मुस्लिम महिला से विवाह किया है और उसके दो बच्चे हैं। 37 वर्षीय युवक के इस अचानक हुए धर्म परिवर्तन से क्षेत्र के लोग हैरान हैं।
म्योरपुर ब्लॉक के रासपहरी गांव निवासी रामशकल चार भाइयों में सबसे छोटा है। उसके पिता का नाम जगरनाथ है। पहले वह बभनी क्षेत्र में रहकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था। बताया जाता है कि इसी दौरान उसकी तबीयत अक्सर खराब रहने लगी। कुछ लोगों के संपर्क में आने के बाद वह अंबेडकरनगर जिले की एक दरगाह पर गया, जहां उसने इस्लाम धर्म स्वीकार कर मो. जहांगीर अशरफ नाम अपना लिया। घर लौटने के बाद उसने पास के गांव किरवानी में निवास करना शुरू किया। एक तिहाई मुस्लिम आबादी वाले इस गांव की मस्जिद में रहकर वह मुअज्जिन के रूप में अजान देने का कार्य करता है। वह कुरान पढ़ता है, नियमित नमाज अदा करता है और मस्जिद में बच्चों को उर्दू-फारसी भी पढ़ाता है। उसके इस बदलाव से परिवार और गांव के लोग हैरान हैं। परिजनों में नाराजगी जरूर है, लेकिन उनका कहना है कि जहां वह संतुष्ट रहे, वहीं उसका भला है।
स्वेच्छा से लिया निर्णय, न डर न लालच
रामशकल उर्फ मो. जहांगीर अशरफ का कहना है कि उसने धर्म परिवर्तन का फैसला अपनी इच्छा से लिया है। उसके अनुसार, इसमें किसी तरह का डर या लालच नहीं था। लंबे समय तक बीमार रहने के बाद जब उसे राहत मिली, तो उसने स्वेच्छा से अपनी पहचान बदलने का निर्णय किया। उसका कहना है कि अब परिवार में शांति है। वह कुरान के साथ रामायण भी रखता है और मानता है कि सभी धर्मों का संदेश एक ही है। परिजनों का कहना है कि रामशकल ने क्यों, कैसे और किसके प्रभाव में धर्म बदला, इसकी उन्हें पहले जानकारी नहीं थी। बाद में उन्हें इस बारे में पता चला। अब वह दूसरे गांव में रहता है और जैसे उसे संतोष मिले, वैसे ही रहे, यही परिवार की भावना है।






