संशोधित वक्फ कानून के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में जल्द ही नई नियमावली तैयार की जाएगी। इस नए कानून के तहत वक्फ बोर्डों का पुनर्गठन किया जाएगा। छह महीने के भीतर सभी वक्फ संपत्तियों को ऑनलाइन किया जाना तय है। माना जा रहा है कि प्रदेश का अल्पसंख्यक कल्याण विभाग जल्द ही वक्फ से संबंधित नई नियमावली का प्रस्ताव सरकार को भेजेगा, जिस पर अंतिम निर्णय सरकार लेगी।
प्रदेश में वक्फ संपत्तियों को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। एक उच्चस्तरीय सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, जिन संपत्तियों को वक्फ के रूप में दर्ज किया गया है, उनमें से 57,792 संपत्तियां सरकारी हैं। इसके अलावा, कुछ शत्रु संपत्तियों और निजी जमीनों को भी गलत तरीके से वक्फ संपत्ति में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वक्फ के नाम पर किसी की भी संपत्ति हड़पने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि केंद्र सरकार द्वारा वक्फ कानून में किए गए संशोधनों पर गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है। इसके लिए प्रदेश को अपनी वर्तमान नियमावली में बदलाव करना होगा। इसमें जिलाधिकारियों को दिए गए नए अधिकारों को भी शामिल किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार की योजना है कि जैसे ही केंद्र सरकार वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण हेतु ऑनलाइन पोर्टल शुरू करे, उसके छह माह के भीतर प्रदेश की सभी वक्फ संपत्तियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिया जाए। हालांकि, चुनौती उन संपत्तियों को लेकर होगी जो अभी तक राजस्व अभिलेखों में वक्फ के रूप में दर्ज नहीं हैं। बता दें कि शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों में सूचीबद्ध 98% संपत्तियां राजस्व रिकॉर्ड में शामिल नहीं हैं। दोनों बोर्डों के अनुसार, प्रदेश में कुल 1,32,140 वक्फ संपत्तियां हैं।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार उन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है, जिन्होंने अवैध रूप से सरकारी या निजी भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में खतौनी में दर्ज किया है। सभी जिलों को ऐसे जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, जो जिलाधिकारी रिपोर्ट भेजने में लापरवाही बरतेंगे, उनकी भी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
उत्तर प्रदेश में नए कानून के तहत नई वक्फ नियमावली बनाएगी सरकार





