काफी खट्टी मीठी यादें छोड़ गया 2025

साल 2025 इतिहास के पन्नों में सिमट चुका है। प्रत्येक की तरह बीता साल भी कुछ मीठी-खट्टी, दुख-दर्द, हंसी-खुशी भरी यादें और उत्थान-पतन की कहानी छोड़कर गया है। प्रदेश के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक हालात में कई महत्वपूर्ण घटनाएँ घटित हुईं, जिनका व्यापक असर राज्य की जनता पर पड़ा। 2025 में राज्य में घटित महत्वपूर्ण घटनाओं, अपराध, विकास कार्य, कानून व्यवस्था और राजनीतिक हलचलों की कहानी काफी कुछ कहती है। पूरे साल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी ने सभी दलों को जोर-शोर से सक्रिय रखा। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सत्ता मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश गौरव यात्रा का आयोजन किया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 75 जिलों का दौरा कर 5 करोड़ से अधिक लोगों को संबोधित किया। विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी ने सामाजिक न्याय यात्रा चलाई, जिसमें अखिलेश यादव ने दो करोड़ युवाओं को जोड़ा। संभल और बरेली में कट्टरपंथियों की हिंसा से प्रदेश की छवि धूमिल हुई। वक्फ बोर्ड के नए कानून ने भी काफी हलचल बनाए रखी।

उधर, एक अन्य घटनाक्रम में अराजनैतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रदेश में लगनी वाली शाखाओं की संख्या बढ़कर 50 हजार हो गई, जिससे हिंदुत्व की लहर तेज हुई। कांग्रेस ने भी पुनरुत्थान की कोशिश की, लेकिन मात्र 5 फीसदी वोट शेयर के साथ असफल रही। महत्वपूर्ण घटना रही राम मंदिर का पूर्ण उद्घाटन हुआ, जहां 10 लाख श्रद्धालु पहुंचे। इसी साल प्रयागराज में लगे महाकुंभ मेले को भी नहीं भूला जा सकता है, 13 जनवरी से 26 फरवरी तक आयोजित मेले में करीब सत्तर करोड़ भक्तों ने संगम में डुबकी लगाई, जिसमें बड़ी संख्या में विदेशी भी शामिल थे।

आर्थिक उत्थान की नई ऊंचाइयां
उत्तर प्रदेश ने आर्थिक मोर्चे पर रिकॉर्ड तोड़ा। राज्य की जीडीपी वृद्धि दर 8.5% रही, जो राष्ट्रीय औसत 7% से अधिक थी। एक जिला एक उत्पाद योजना से 20 लाख रोजगार सृजित हुए। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर 500 नई इकाइयां स्थापित हुईं, जिनसे 10,000 करोड़ का निवेश आया। कृषि क्षेत्र में सूर्यास्त से पहले बिक्री योजना से किसानों को 50,000 करोड़ का लाभ हुआ। 1 करोड़ से अधिक किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए। पर्यटन में अयोध्या का योगदान सबसे बड़ा रहा, जहां 2 करोड़ पर्यटक आए और 15,000 करोड़ की आय हुई। बुनियादी ढांचे में 10 नए हवाई अड्डे चालू हुए, जिससे निर्यात 30% बढ़ा। महंगाई दर 5% पर नियंत्रित रही, लेकिन बेरोजगारी 6% पर स्थिर रही। कुल 25 लाख नौकरियां पैदा हुईं, जो राज्य को भारत का दूसरा सबसे बड़ा अर्थतंत्र बनाया।

सामाजिक परिवर्तनों की लहर
सामाजिक क्षेत्र में 2025 ने कई मील के पत्थर गाड़े। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ से लड़कियों का स्कूल नामांकन 95% पहुंचा। 50 लाख बालिकाओं को साइकिल वितरित की गईं। जातिगत जनगणना की मांग तेज हुई, जिसमें ओबीसी आबादी 52% बताई गई। वहीं महिला सशक्तिकरण में 2 लाख स्वयं सहायता समूह बने, जिन्होंने 5,000 करोड़ का कारोबार किया। कोविड के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार से शिशु मृत्यु दर 20 प्रति हजार घटी। ग्रामीण विद्युतीकरण 100% हो गया, तीन करोड़ घरों में बिजली पहुंची। दलित-मुस्लिम एकता की घटनाएं बढ़ीं, लेकिन सांप्रदायिक तनाव के 200 मामले दर्ज हुए। शिक्षा में 1,000 नए स्कूल खुले, साक्षरता दर 82% हो गई।

अपराध और कानून व्यवस्था की चुनौतियां
कानून व्यवस्था में मिश्रित परिणाम आए। अपराध दर 15% घटी, 2 लाख मामले दर्ज हुए। पुलिस मॉडर्नाइजेशन से 5,000 सीसीटीवी कैमरे लगे। गैंगस्टर एक्ट के तहत 500 गिरोहबाज जेल पहुंचे। वहीं महिला अपराधों में 20% वृद्धि हुई, 50,000 मामले दर्ज। लव जिहाद के 1,000 केस सामने आए। साइबर अपराध 40% बढ़े, 10,000 शिकायतें आईं। नार्को ड्रग्स जब्ती में रिकॉर्ड 500 किलो हेरोइन पकड़ी गई। पुलिस भर्ती में 60,000 पद भरे गए। बीते साल खूंखार अपराधियों की मृत्यु से माफिया राज कमजोर हुआ। हालांकि, 100 पुलिस मुठभेड़ों में 200 अपराधी ढेर हुए, जिस पर विवाद रहा। कुल मिलाकर, अपराध नियंत्रण में 70% सफलता मिली।

उत्थान-पतन की समग्र कहानी
2025 उत्तर प्रदेश के लिए उम्मीदों भरा साल साबित हुआ। राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक उछाल और विकास कार्यों ने राज्य को नई ऊंचाई दी। 10 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला। चुनौतियां जैसे अपराध और बेरोजगारी बनी रहीं, लेकिन कानून व्यवस्था मजबूत हुई। भविष्य में 2027 चुनाव निर्णायक होंगे। योगी सरकार को 55% लोकप्रियता मिली। सामाजिक एकता बढ़ी, लेकिन जातिगत समीकरण जटिल बने। कुल 2,500 करोड़ की कल्याण योजनाएं चलीं। यह साल इतिहास में विकास का वर्ष के रूप में दर्ज होगा, जहां दर्द के साथ खुशियां भी बंटीं।

आर्थिक उत्थान की नई ऊंचाइयां
उत्तर प्रदेश ने आर्थिक मोर्चे पर रिकॉर्ड तोड़ा। राज्य की जीडीपी वृद्धि दर 8.5% रही, जो राष्ट्रीय औसत 7% से अधिक थी। एक जिला एक उत्पाद योजना से 20 लाख रोजगार सृजित हुए। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर 500 नई इकाइयां स्थापित हुईं, जिनसे 10,000 करोड़ का निवेश आया। जबकि कृषि क्षेत्र में सूर्यास्त से पहले बिक्री योजना से किसानों को 50,000 करोड़ का लाभ हुआ। 1 करोड़ से अधिक किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए। पर्यटन में अयोध्या का योगदान सबसे बड़ा रहा, जहां 2 करोड़ पर्यटक आए और 15,000 करोड़ की आय हुई। बुनियादी ढांचे में 10 नए हवाई अड्डे चालू हुए, जिससे निर्यात 30% बढ़ा। महंगाई दर 5% पर नियंत्रित रही, लेकिन बेरोजगारी 6% पर स्थिर रही। कुल 25 लाख नौकरियां पैदा हुईं, जो राज्य को भारत का दूसरा सबसे बड़ा अर्थतंत्र बनाया। आवास योजना से 20 लाख गरीबों को घर मिले। जल जीवन मिशन से 5 करोड़ घरों में नल जुड़ें। सौर ऊर्जा क्षमता 10,000 मेगावाट पहुंची। गंगा एक्सप्रेसवे पूरा होने से लॉजिस्टिक्स लागत 30% घटी। उद्योग नीति से 50 हजार करोड़ का निवेश आया। डिजिटल इंडिया से 90% गांव इंटरनेट से जुड़े। पर्यावरण में 1 करोड़ पेड़ लगाए गए। ये कार्य राज्य को ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर ले गए।

बुलडोजर कार्रवाई
2025 में उत्तर प्रदेश सरकार ने अपराधियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई को तेज किया। यह कार्रवाई मुख्य रूप से माफिया और उनके अवैध निर्माणों पर केंद्रित थी। सरकार का कहना था कि यह कदम राज्य में अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश देने के लिए था। कई माफिया और गुंडे, जिनके पास बड़े अवैध निर्माण और संपत्ति थी, उन पर बुलडोजर से कार्रवाई की गई। हालांकि इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद भी उठे, और कई विपक्षी दलों ने इसे अवैध और तानाशाही करार दिया। उत्तर प्रदेश पुलिस ने कई बड़े अपराधियों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया। राज्य सरकार ने पुलिस को और अधिक अधिकार दिए ताकि वे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकें। इसके परिणामस्वरूप, कुछ प्रमुख अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और उनकी संपत्तियों को जब्त किया गया।

सुधार की दिशा में कदम
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। पुलिस व्यवस्था में सुधार करने के लिए नए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत की गई। इसके अलावा, पुलिस स्टेशनों में तकनीकी उपकरणों की संख्या बढ़ाई गई, ताकि अपराधियों को पकड़ने में मदद मिल सके। महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी विशेष कदम उठाए गए। महिला पुलिस बलों की संख्या में वृद्धि की गई और महिला हेल्पलाइन की सुविधा को और प्रभावी बनाया गया। हालांकि, इसके बावजूद, महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं में कमी आने के बजाय उनका प्रतिशत कुछ हद तक बढ़ा। 2025 में उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के विकास कार्यों पर जोर दिया। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, और बुनियादी ढांचे में सुधार की दिशा में कई परियोजनाएँ शुरू की गईं। राज्य सरकार ने किसानों के लिए कर्ज माफी योजनाओं की घोषणा की और कृषि उपकरणों पर सब्सिडी दी। हालांकि, बेरोजगारी की समस्या अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी रही। राज्य में नए उद्योगों की स्थापना के बावजूद, बेरोजगारी दर में कोई खास कमी नहीं आई।

शहरीकरण और इन्फ्रास्ट्रक्चर
मुख्य रूप से शहरी इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास हुआ। कई बड़े शहरों में मेट्रो परियोजनाओं की शुरुआत की गई। राजधानी लखनऊ और कानपुर जैसे शहरों में नई सड़कें, फ्लाईओवर्स, और आवासीय परियोजनाएँ शुरू हुईं।

राजनीतिक माहौल और दलों का रवैया
2025 में उत्तर प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त हलचल देखने को मिली। राज्य में प्रमुख राजनीतिक दलों भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.), समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस के बीच जोरदार चुनावी संघर्ष देखने को मिला। इन दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति रही। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए हिंदू मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए कई योजनाओं का ऐलान किया। सरकार ने हिंदू धार्मिक स्थलों के विकास के लिए बजट बढ़ाया और हिंदू धर्म से जुड़े कई विवादित मुद्दों पर भी आवाज उठाई।

राजनीतिक दलों का रवैया समाजवादी पार्टी
सपा ने मुसलमानों और पिछड़े वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की। सपा ने यह दावा किया कि वह समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करती है। पार्टी ने राज्य में कई विकास परियोजनाओं के लिए वादे किए और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।

बहुजन समाज पार्टी
बसपा ने दलितों और पिछड़े वर्गों को ध्यान में रखते हुए अपनी राजनीति को आगे बढ़ाया। मायावती ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में दलितों के अधिकारों की बात की और अपनी पार्टी को एक मजबूत विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया। 2025 में पूरे साल राजनीतिक दलों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। भारतीय जनता पार्टी ने अपने शासन को बनाए रखने के लिए व्यापक प्रचार किया, जबकि सपा और बसपा ने अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश की। कांग्रेस पार्टी ने हिंदू-मुस्लिम सियासत और ध्रुवीकरण की बढ़ती स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश की।

उत्तर प्रदेश में बीता साल हिंदू-मुस्लिम सियासत एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा। हिंदू वोट बैंक को साधने के लिए भाजपा ने कई धार्मिक मुद्दों को हवा दी। वहीं, सपा और बसपा ने मुस्लिम वोटों को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की। इस स्थिति ने राज्य में सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दिया, जिससे शांति और सद्भाव की स्थिति प्रभावित हुई। हिंदू-मुस्लिम मुद्दों ने राज्य की राजनीति में स्थिरता को खतरे में डाल दिया। धार्मिक असहमति और भेदभाव की भावना ने राज्य में तनाव को बढ़ाया, हालांकि राज्य सरकार ने इस पर नियंत्रण पाने के प्रयास किए।

अजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ
(ये लेखक के अपने स्वयं के निजी विचार हैं)

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