यूपी: चुनाव आयोग ने सभी ईआरओ को मतदाता सूची में दर्ज पतों को ठीक करने के निर्देश दिए

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में दर्ज पतों से जुड़ी दशकों पुरानी त्रुटियों को दुरुस्त करने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को स्पष्ट जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग ने बूथ विभाजन में नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाते हुए बिना आधार के मोबाइल नंबर लिंक करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की है। आयोग ने सभी ईआरओ को मतदाता सूची में दर्ज पतों को सुधारने के निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि यह समस्या लगभग सभी मतदान केंद्रों की सूचियों में पाई जा रही है। मतदाता सूची में कई असंबंधित व्यक्तियों के नामों के सामने एक ही मकान नंबर दर्ज होना एक आम त्रुटि है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह स्थिति विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण उत्पन्न नहीं हुई, क्योंकि गणना चरण में मतदाता विवरण में कोई संशोधन नहीं किया गया था। यह विसंगति वर्षों से चली आ रही है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि इन त्रुटियों के पीछे कई कारण हैं। प्रमुख कारण यह है कि अधिकांश गांवों में मकानों के नंबर नहीं होते, जबकि शहरों में भी अनेक मकानों के स्पष्ट नंबर उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण गांवों में काल्पनिक नंबर दर्ज कर दिए जाते हैं और शहरी क्षेत्रों में 0 या 00 जैसे नंबर लिख दिए जाते हैं। मतदाता सूची के भागों का पर्याप्त और स्पष्ट अनुभागों में विभाजन न होना भी इस समस्या का एक कारण रहा है। इसे सुधारने के लिए सभी ईआरओ को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आयोग ने कहा है कि प्रत्येक पोलिंग स्टेशन के मतदान क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में स्पष्ट अनुभाग बनाए जाएं, ताकि मतदाता पर्चियों के वितरण में सुविधा हो और असंबंधित व्यक्तियों के एक जैसे मकान नंबर दर्ज होने की समस्या कम हो सके। बीएलओ को अपने-अपने क्षेत्रों के सभी बूथों की मतदाता सूचियों की गहन समीक्षा कर ऐसी त्रुटियों को दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

बूथ विभाजन में नियम उल्लंघन पर सख्ती
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मेरठ के जिलाधिकारी और कैंट क्षेत्र के ईआरओ से एक ही अनुभाग के मतदाताओं को अलग-अलग भागों में दर्ज किए जाने के मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने पूछा है कि बूथ विभाजन के दौरान उसके निर्देशों का उल्लंघन क्यों किया गया, एक ही अनुभाग के मतदाताओं को दो अलग-अलग भागों में क्यों स्थानांतरित किया गया तथा भाग संख्या 10 में केवल एक ही अनुभाग क्यों बनाया गया।

बिना आधार के भी मोबाइल नंबर लिंक करने की सुविधा
आयोग ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड के बिना भी मोबाइल नंबर को वोटर कार्ड से लिंक किया जा सकता है। इसके लिए फॉर्म-8 ऑफलाइन जमा करना होगा। हालांकि, यदि कोई फॉर्म ऑनलाइन जमा किया जाता है तो ई-सिग्नेचर अनिवार्य होगा, जिसके लिए आधार से लिंक मोबाइल नंबर आवश्यक है। ऑनलाइन किसी भी फॉर्म को भरने के लिए आधार नंबर और उससे जुड़ा मोबाइल नंबर होना जरूरी होगा।

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading