चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में दर्ज पतों से जुड़ी दशकों पुरानी त्रुटियों को दुरुस्त करने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को स्पष्ट जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग ने बूथ विभाजन में नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाते हुए बिना आधार के मोबाइल नंबर लिंक करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की है। आयोग ने सभी ईआरओ को मतदाता सूची में दर्ज पतों को सुधारने के निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि यह समस्या लगभग सभी मतदान केंद्रों की सूचियों में पाई जा रही है। मतदाता सूची में कई असंबंधित व्यक्तियों के नामों के सामने एक ही मकान नंबर दर्ज होना एक आम त्रुटि है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह स्थिति विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण उत्पन्न नहीं हुई, क्योंकि गणना चरण में मतदाता विवरण में कोई संशोधन नहीं किया गया था। यह विसंगति वर्षों से चली आ रही है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि इन त्रुटियों के पीछे कई कारण हैं। प्रमुख कारण यह है कि अधिकांश गांवों में मकानों के नंबर नहीं होते, जबकि शहरों में भी अनेक मकानों के स्पष्ट नंबर उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण गांवों में काल्पनिक नंबर दर्ज कर दिए जाते हैं और शहरी क्षेत्रों में 0 या 00 जैसे नंबर लिख दिए जाते हैं। मतदाता सूची के भागों का पर्याप्त और स्पष्ट अनुभागों में विभाजन न होना भी इस समस्या का एक कारण रहा है। इसे सुधारने के लिए सभी ईआरओ को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आयोग ने कहा है कि प्रत्येक पोलिंग स्टेशन के मतदान क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में स्पष्ट अनुभाग बनाए जाएं, ताकि मतदाता पर्चियों के वितरण में सुविधा हो और असंबंधित व्यक्तियों के एक जैसे मकान नंबर दर्ज होने की समस्या कम हो सके। बीएलओ को अपने-अपने क्षेत्रों के सभी बूथों की मतदाता सूचियों की गहन समीक्षा कर ऐसी त्रुटियों को दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
बूथ विभाजन में नियम उल्लंघन पर सख्ती
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मेरठ के जिलाधिकारी और कैंट क्षेत्र के ईआरओ से एक ही अनुभाग के मतदाताओं को अलग-अलग भागों में दर्ज किए जाने के मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने पूछा है कि बूथ विभाजन के दौरान उसके निर्देशों का उल्लंघन क्यों किया गया, एक ही अनुभाग के मतदाताओं को दो अलग-अलग भागों में क्यों स्थानांतरित किया गया तथा भाग संख्या 10 में केवल एक ही अनुभाग क्यों बनाया गया।
बिना आधार के भी मोबाइल नंबर लिंक करने की सुविधा
आयोग ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड के बिना भी मोबाइल नंबर को वोटर कार्ड से लिंक किया जा सकता है। इसके लिए फॉर्म-8 ऑफलाइन जमा करना होगा। हालांकि, यदि कोई फॉर्म ऑनलाइन जमा किया जाता है तो ई-सिग्नेचर अनिवार्य होगा, जिसके लिए आधार से लिंक मोबाइल नंबर आवश्यक है। ऑनलाइन किसी भी फॉर्म को भरने के लिए आधार नंबर और उससे जुड़ा मोबाइल नंबर होना जरूरी होगा।






