
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका की बड़ी तेल कंपनियों को वेनेजुएला भेजा जाएगा। ये कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश कर वहां के बुरी तरह क्षतिग्रस्त तेल बुनियादी ढांचे की मरम्मत करेंगी और इसके जरिए देश के लिए राजस्व अर्जित किया जाएगा।
शुक्रवार को ट्रंप ने जानकारी दी कि वेनेजुएला ने वॉशिंगटन को 52 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के 50 मिलियन बैरल तेल की पेशकश की है, जिस पर अमेरिका ने सहमति जता दी है। सदर्न बुलेवार्ड का नाम बदलकर डोनाल्ड जे. ट्रंप बुलेवार्ड किए जाने के अवसर पर उन्होंने कहा, “हम नई राष्ट्रपति से बातचीत कर रहे हैं। देश का संचालन कर रहे लोगों से भी लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास 5 करोड़ बैरल तेल है, जिसे तुरंत प्रोसेस करना जरूरी है क्योंकि हमारे पास भंडारण की जगह नहीं है। क्या आप इसे लेना चाहेंगे? मैंने कहा—हां, हम इसे लेंगे। यह सौदा 5.2 अरब अमेरिकी डॉलर का है।”
वेनेजुएला के साथ ‘बेहतर संबंधों’ का दावा
ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद गठित वेनेजुएला की अंतरिम सरकार के साथ अमेरिका के रिश्तों को ‘बेहद अच्छे’ बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरिम राष्ट्रपति और उनकी टीम के साथ संबंध मजबूत रहे हैं, जिससे हालात का दबाव काफी हद तक कम हुआ है। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने साफ किया था कि इस दौरान वेनेजुएला के संचालन में वॉशिंगटन की अहम भूमिका होगी और इसके लिए तेल समेत देश के अन्य संसाधनों तक पूरी पहुंच जरूरी है। ट्रंप के हालिया बयान न्यूयॉर्क स्थित समाचार आउटलेट ‘सेमाफोर’ की उस रिपोर्ट की भी पुष्टि करते हैं, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ने वेनेजुएला से 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का पहला तेल पहले ही खरीदा है।
अमेरिकी कंपनियों के निवेश के पीछे क्या वजह
सेमाफोर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि तेल बिक्री से होने वाली आय फिलहाल अमेरिकी सरकार के नियंत्रण वाले बैंक खातों में जमा की जा रही है। एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक मुख्य खाता कतर में स्थित है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला के पास लगभग 303 अरब बैरल कच्चे तेल का विशाल भंडार है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (ईआईए) के आंकड़ों के मुताबिक यह दुनिया के कुल तेल भंडार का करीब पांचवां हिस्सा है। इससे पहले ट्रंप यह भी कह चुके हैं कि वे वेनेजुएला के जर्जर तेल बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए प्रमुख अमेरिकी तेल कंपनियों के जरिए अरबों डॉलर के निवेश की योजना बना रहे हैं।






