17 जनवरी को ही क्यों की गई विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना?

गरुड़ पुराण से जुड़ा इस स्थान का रहस्य

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के चकिया–केसरिया रोड स्थित कैथवलिया गांव में स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की भव्य स्थापना की गई है। इस ऐतिहासिक और धार्मिक आयोजन के लिए वाराणसी और अयोध्या सहित देश के विभिन्न तीर्थस्थलों से विद्वान पंडितों को आमंत्रित किया गया था, जिन्होंने विधिवत मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना करशिवलिंग की स्थापना की है। शिवलिंग का अभिषेक गंगा सहित 8 पवित्र नदियों के जल से किया गया। इसके बाद सहस्त्रलिंगम शिवलिंग स्थापना की प्रक्रिया आरंभ की गई। शिवलिंग स्थापना को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल था। इस अलौकिक क्षण का साक्षी बनने और उसे अपने कैमरे में कैद करने के लिए दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर परिसर और आसपास फूल-पूजा सामग्री की छोटी-बड़ी दुकानें सजी हुई थी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हुए, जिसको देखते हुए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।

अयोध्या–वाराणसी सहित देशभर के कई पंडितों ने करवाई पूजा
शिवलिंग स्थापना को लेकर सुबह 8 बजे से वैदिक पूजा-पाठ जारी हो गई। पूजा के लिए पटना महावीर मंदिर से सात पंडितों के साथ-साथ अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, गुजरात, हरिद्वार और महाराष्ट्र से भी आचार्य पहुंचे थे। इस भव्य यज्ञ में चारों वेदों के विद्वानों को आमंत्रित किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चार एलईडी स्क्रीन लगाई गई थी, ताकि स्थापना प्रक्रिया का लाइव प्रसारण देखा जा सके।

8 पवित्र नदियों के जल से हुआ शिवलिंग का अभिषेक
शिवलिंग के अभिषेक के लिए कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, यमुनोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज, गंगासागर, सोनपुर, रामेश्वरम के साथ-साथ सिंधु, नर्मदा, नारायणी, कावेरी और गंडक नदियों का पवित्र जल मंगवाया गया था। चूँकि 17 जनवरी (शनिवार) को माघ कृष्ण चतुर्दशी तिथि है। मान्यता है कि इसी दिन शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी और भगवान शिव की लिंग रूप में प्रथम पूजा हुई थी। इसी धार्मिक कारण से इस शुभ तिथि को शिवलिंग स्थापना का आयोजन किया गया है।

विशेष फूलों और विशाल माला से सजा शिवलिंग
शिवलिंग स्थापना पूजा के लिए कंबोडिया और कोलकाता से विशेष फूल मंगवाए गए हैं। जिसमें गुलाब, गेंदा और गुलदाउदी शामिल हैं। शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए 18 फीट लंबी विशेष माला तैयार की गई थी, जिसमें फूलों के साथ भांग, धतूरा और बेलपत्र का उपयोग किया गया है। शिवलिंग को स्थापित करने के लिए राजस्थान और भोपाल से दो बड़ी क्रेन मंगाई गई हैं।

कैथवलिया गांव में ही क्यों हुई है शिवलिंग की स्थापना?
अरेराज महात्म्य और गरुड़ पुराण के अनुसार, श्रीराम जनकपुर में विवाह के बाद इसी मार्ग से अयोध्या लौटे थे। इस दौरान अरेराज स्थित सोमेश्वरनाथ मंदिर में माता सीता के साथ उन्होंने भगवान शिव की पूजा-अर्चना की थी। इसी पौराणिक मान्यता के कारण कैथवलिया गांव में महादेव के इस विशाल शिवलिंग की स्थापना की जा रही है, जो इस स्थान के धार्मिक महत्व को और अधिक बढ़ाती है।

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