
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में जिन हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की है, वे किन शहरों को जोड़ेंगे? इनकी संभावित लंबाई कितनी होगी, रूट क्या रहेगा और अब तक क्या तैयारियां की गई हैं, इन सवालों के जवाब जानना अहम है।
केंद्रीय बजट 2026 में रेलवे सेक्टर को लेकर कई बड़े ऐलान किए गए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण घोषणा देशभर में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण की है। दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी सहित कुल सात हाई-स्पीड रेल मार्ग विकसित किए जाएंगे। बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ यात्री परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शहरों के बीच ‘ग्रोथ कनेक्टर’ के रूप में ये हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाएंगे। ऐसे में आइए जानते हैं कि ये हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर किन-किन शहरों को जोड़ेंगे और इनकी मौजूदा स्थिति क्या है।
ये सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर होंगे विकसित
- दिल्ली–वाराणसी
- वाराणसी–सिलीगुड़ी
- मुंबई–पुणे
- पुणे–हैदराबाद
- हैदराबाद–चेन्नई
- हैदराबाद–बंगलूरू
- बंगलूरू–चेन्नई
- दिल्ली–वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
दिल्ली–वाराणसी हाई-स्पीड रेल रूट पर कुल 13 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें दिल्ली का स्टेशन भूमिगत होगा, जबकि उत्तर प्रदेश के 12 स्टेशन एलिवेटेड ट्रैक पर बनाए जाएंगे।
अब तक की प्रगति
- रिपोर्ट्स के अनुसार, यह प्रोजेक्ट फिलहाल योजना और रिपोर्टिंग के उन्नत चरण में है।
- जनवरी 2021 में सटीक रूट निर्धारण के लिए LiDAR (लेजर तकनीक) सर्वे शुरू किया गया।
- नवंबर 2021 में नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने डीपीआर भारतीय रेलवे को सौंपी।
- रिपोर्ट में पर्यावरणीय प्रभाव, भूमि आवश्यकता और यात्री मांग का विस्तृत आकलन शामिल है।
- जुलाई 2022 तक अंतिम रूट और स्टेशनों के स्थान तय कर लिए गए थे।
- रेल मंत्रालय स्पष्ट कर चुका है कि यह परियोजना रद्द नहीं हुई है और सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
- अधिकारियों के अनुसार, इस रूट पर 2029 के आसपास बुलेट ट्रेन संचालन का लक्ष्य है।
- वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के वाराणसी को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से जोड़ेगा, जिससे पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
मौजूदा स्थिति
- यह सात कॉरिडोर में से एकमात्र ऐसा मार्ग है, जिसकी डीपीआर अभी तैयार नहीं हुई है।
- अन्य छह कॉरिडोर की डीपीआर पहले ही रेल मंत्रालय को सौंपी जा चुकी है।
- नई घोषणा होने के कारण फिलहाल सर्वे और प्रारंभिक तैयारियां शुरुआती चरण में हैं।
- सरकार ने इसे उत्तर और पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने वाले एक अहम ग्रोथ कनेक्टर के रूप में चिन्हित किया है।
- मुंबई–पुणे और पुणे–हैदराबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
मुंबई–पुणे कॉरिडोर, मुंबई–हैदराबाद हाई-स्पीड नेटवर्क का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य बुलेट ट्रेन के जरिए प्रमुख महानगरों की कनेक्टिविटी बढ़ाना है।
मौजूदा स्थिति
- NHSRCL ने इस रूट की डीपीआर तैयार कर रेल मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेज दी है।
- सटीक मार्ग निर्धारण के लिए LiDAR हवाई सर्वे शुरू किया जा चुका है।
- परियोजना फिलहाल रेलवे बोर्ड की अंतिम स्वीकृति की प्रतीक्षा में है।
- पुणे नगर निगम के नए सम्मिलित क्षेत्रों में भूमि और नियोजन से जुड़े समन्वय पर काम जारी है।
- हैदराबाद–चेन्नई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
मौजूदा स्थिति
- इस परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी NHSRCL के पास है।
- नवंबर 2025 में दक्षिण मध्य रेलवे ने अंतिम रिपोर्ट तमिलनाडु सरकार को सौंपी, जिसमें कुछ संशोधनों का सुझाव दिया गया।
- भारत सरकार की कंपनी RITES ने इस रूट का सर्वेक्षण किया है।
- तमिलनाडु सरकार से मंजूरी मिलने के एक महीने के भीतर डीपीआर को अंतिम रूप देने की योजना है।
- तमिलनाडु में 61 किमी लंबे हिस्से में 11.6 किमी लंबी सुरंग बनाई जाएगी, जो तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होगी।
- इस कॉरिडोर के लिए लगभग 223.44 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी, जिसमें कोई वन भूमि शामिल नहीं है।
- हैदराबाद–बंगलूरू हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
मौजूदा स्थिति
- सितंबर 2025 में इस कॉरिडोर के सर्वेक्षण के आदेश जारी किए गए थे।
- यह मार्ग हैदराबाद, चेन्नई, अमरावती और बंगलूरू को जोड़ने वाले एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा होगा।
- नेशनल रेल प्लान के अनुसार, 2041 तक हैदराबाद–बंगलूरू हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी का लक्ष्य रखा गया है।
- यह कॉरिडोर दक्षिण भारत के आर्थिक विकास को गति देने वाला ग्रोथ कनेक्टर माना जा रहा है।
- बंगलूरू–चेन्नई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
इस रूट का लगभग 84% हिस्सा एलिवेटेड, 11% भूमिगत और करीब 5% जमीन पर होगा। इसमें लगभग 30 किमी लंबा सुरंग नेटवर्क शामिल रहेगा।
मौजूदा स्थिति
- NHSRCL ने इस कॉरिडोर की डीपीआर रेल मंत्रालय को सौंप दी है।
- LiDAR सर्वे और ट्रैक अलाइनमेंट डिजाइन के अनुबंध पहले ही दिए जा चुके हैं।
- चेन्नई से कोलार तक भूमि सर्वे पूरा हो चुका है।
- मार्च 2024 तक पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) समेत प्रारंभिक कार्य पूरे कर लिए गए थे और जन परामर्श भी आयोजित किया गया।

यह सातों हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर देश में आधुनिक, तेज और पर्यावरण-अनुकूल रेल नेटवर्क की दिशा में एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं।






