
बुंदेलखंड को पृथक राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर जारी जन आक्रोश रथ यात्रा के दौरान मशाल जुलूस निकाला गया। इस दौरान तीखे नारेबाजी के साथ समर्थकों ने नेतृत्व को बड़े और निर्णायक आंदोलन की चेतावनी दी।
बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग नई नहीं है। आज़ादी के बाद से चली आ रही इस मांग का ऐतिहासिक आधार रहा है। यह क्षेत्र वीरता और बलिदान की परंपरा के लिए जाना जाता है, जहां रानी लक्ष्मीबाई और छत्रसाल जैसे महापुरुषों की विरासत रही है। इसी पृष्ठभूमि में सागर सहित अंचल में जन आक्रोश रथ यात्रा जारी है। बुंदेलखंड राज्य निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानू सहाय के नेतृत्व में निकाली जा रही यह यात्रा क्षेत्र में तेज़ी से जनसमर्थन जुटा रही है। 16 फरवरी को चित्रकूट के कामतानाथ मंदिर से शुरू हुई यात्रा 13 मार्च को ओरछा धाम में संपन्न होगी। यह यात्रा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल के विभिन्न जिलों से होकर गुजर रही है।
मशाल जुलूस के साथ चेतावनी
गुरुवार को यात्रा कटरा से निकाली गई। हाथों में मशाल लिए कार्यकर्ताओं ने “बुंदेलखंड तो लेंगे, जैसे दोगे वैसे लेंगे” जैसे नारों के साथ अलग राज्य की मांग को मुखर किया। अध्यक्ष भानू सहाय ने कहा कि बुंदेलखंड के समग्र विकास और राज्य निर्माण को लेकर आंदोलन निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। यात्रा के पश्चात वादाखिलाफी करने वाले नेताओं के पुतले दहन की भी घोषणा की गई। यात्रा में डॉ. अंकलेश्वर दुबे, डॉ. विवेक तिवारी, भरत सोनी, निखिल, अभिषेक, शुभ पाठक, रोनित, शिवचरण साहू, रघुराज शर्मा, वरुण अग्रवाल, भगवान सिंह यादव, हनीफ खान सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल रहे।
कटरा में जोरदार प्रदर्शन
यह यात्रा चित्रकूट से शुरू होकर बांदा, पन्ना, दमोह, सागर, टीकमगढ़, ललितपुर, दतिया, जालौन, हमीरपुर, महोबा, छतरपुर, निवाड़ी और झांसी होते हुए ओरछा पहुंचेगी।
सागर में कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं से मुलाकात कर राज्य निर्माण के लाभ बताए गए, जहां पूर्ण समर्थन मिला। पर्चा वितरण और जनसंपर्क के दौरान भी आमजन ने पहल की सराहना की। तीन बत्ती चौराहे पर निकाले गए मशाल जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही।
नए प्रदेश का प्रस्ताव
वर्तमान में बुंदेलखंड क्षेत्र मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में फैला है। प्रस्तावित राज्य में उत्तर प्रदेश के झांसी, बांदा, ललितपुर, हमीरपुर, जालौन, महोबा, चित्रकूट तथा मध्य प्रदेश के दतिया, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह और पन्ना सहित 13–14 जिलों को शामिल करने की मांग उठती रही है। समर्थकों का कहना है कि अलग राज्य बनने से सूखा, बेरोजगारी और पलायन जैसी दीर्घकालिक समस्याओं का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।






