
अगले महीने से जनगणना का पहला चरण शुरू होगा, जिसमें मकानों और क्षेत्रों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। इस बार जनगणना को अधिक सटीक, तेज और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पिछली जनगणना (2011) के दौरान सामने आई देरी और तकनीकी चुनौतियों से सीख लेते हुए इस बार बेहतर प्रशिक्षण और डिजिटल प्रणाली लागू की गई है, ताकि आंकड़े अधिक विश्वसनीय हों और परिणाम जल्द उपलब्ध कराए जा सकें। जनगणना के दौरान एकत्रित होने वाले आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला, उप-जिला और गांव स्तर के नक्शों को अपडेट और सटीक बनाया जा रहा है। जनगणना 2027 के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सरकार जनगणना कर्मियों के साथ-साथ आम जनता में भी जागरूकता और भरोसा बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि लोगों की भागीदारी बढ़ सके। आबादी की गणना की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए जनगणना प्रबंधन और निगरानी से जुड़े डिजिटल पोर्टल पर 7 लाख से अधिक इंटीग्रेटेड जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS) आधारित नक्शे अपलोड किए गए हैं। एक वेब-आधारित मैपिंग एप्लिकेशन के माध्यम से इन नक्शों की जियो-टैगिंग की जाएगी, जिससे आंकड़ों के दोहराव और त्रुटियों को रोका जा सकेगा।
2011 की जनगणना से मिली सीख
2011 की जनगणना के विस्तृत परिणाम आने में काफी समय लगा था। इसकी मुख्य वजह आंकड़ों के विश्लेषण और निष्कर्ष निकालने की जटिल प्रक्रिया थी। कई स्थानों पर मानचित्रों के भेजने और प्राप्त होने में भी देरी हुई थी। इसके अलावा कुछ प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को मानचित्रों के सही उपयोग की जानकारी नहीं थी, जिसे प्रशिक्षण की कमी का परिणाम माना गया। आसपास के गणना ब्लॉकों और प्रमुख स्थलों (लैंडमार्क) से संबंधित जानकारी का भी अभाव पाया गया था। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इस बार मकान सूचीकरण के पहले चरण में मास्टर ट्रेनरों और प्रगणकों को नक्शों के उपयोग और उनकी उपयोगिता के बारे में विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि जनगणना की प्रक्रिया अधिक सटीक और प्रभावी ढंग से पूरी की जा सके।






