
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान बुधवार को लोकसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला। इसी दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव सदन में ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चला। अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की पहली प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा प्रयास किया है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्षता, अनुशासन और संसदीय नियमों के अनुरूप संचालित हो। उन्होंने बताया कि विपक्ष के कुछ सदस्यों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था और उस प्रस्ताव पर विचार के दौरान वे सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए। अपने संबोधन में ओम बिरला ने यह भी स्पष्ट किया कि सांसदों के माइक्रोफोन को नियंत्रित करने से जुड़े आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसा कोई स्विच या व्यवस्था नहीं है जिससे माइक्रोफोन को नियंत्रित किया जा सके।
सदन नियमों से चलता है: बिरला
ओम बिरला ने बिना नाम लिए विपक्ष के कुछ नेताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ सदस्य यह मानते हैं कि विपक्ष का नेता सदन से ऊपर होता है और किसी भी विषय पर कभी भी बोल सकता है, लेकिन किसी को भी ऐसा विशेष अधिकार प्राप्त नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद की कार्यवाही तय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार चलती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संसदीय परंपराओं के तहत प्रधानमंत्री और मंत्रियों को भी सदन में बयान देने से पहले पूर्व सूचना देनी पड़ती है। उल्लेखनीय है कि लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए 118 विपक्षी सांसदों के समर्थन से यह अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। विपक्ष का आरोप था कि स्पीकर का रुख पक्षपातपूर्ण रहा है और उनका कार्यालय अपेक्षित निष्पक्षता बनाए रखने में असफल रहा है।
कांग्रेस का रुख पूरी तरह नकारात्मक: अमित शाह
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रवैया पूरी तरह नकारात्मक हो गया है और सरकार का विरोध करते-करते वह देशहित के मुद्दों का भी विरोध करने लगी है। उन्होंने विपक्ष के नेता की उस शिकायत पर भी टिप्पणी की, जिसमें कहा गया था कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता और उनकी आवाज दबाई जाती है। अमित शाह ने कहा, “मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि यह कौन तय करेगा कि किसे बोलना है। क्या स्पीकर तय करेंगे? नहीं, यह आपको तय करना है। लेकिन जब बोलने का अवसर आता है, तब आप जर्मनी या इंग्लैंड में नजर आते हैं और फिर शिकायत करते हैं।”




