
अब राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार
महाराष्ट्र में ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ अब कानून बनने के अंतिम चरण में पहुंच गया है। राज्य विधानसभा के बाद मंगलवार को विधान परिषद ने भी इस विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसके बाद इसे राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। यह विधेयक जबरदस्ती, प्रलोभन, धोखाधड़ी या विवाह के नाम पर किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है। गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने इसे सदन में पेश किया था। दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब इसकी अंतिम मंजूरी राज्यपाल के हाथ में है।
नए कानून में दोषियों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। शादी का झांसा देकर धर्म परिवर्तन कराने पर सात साल तक की जेल और एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि मामला महिला, नाबालिग या अनुसूचित जाति/जनजाति से जुड़ा हो, तो जुर्माना बढ़ाकर पांच लाख रुपये तक किया गया है। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में भी सात साल की सजा और पांच लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। बार-बार अपराध करने वालों के लिए दस साल तक की कैद हो सकती है।
धर्म परिवर्तन के लिए नई प्रक्रिया
कानून के अनुसार, धर्म बदलने के इच्छुक व्यक्ति को 60 दिन पहले संबंधित प्राधिकारी को लिखित सूचना देनी होगी। धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित व्यक्ति और प्रक्रिया कराने वाली संस्था, दोनों को इसकी जानकारी प्रशासन को देनी होगी। ऐसे मामलों की जांच केवल सब-इंस्पेक्टर या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाएगी। सरकार ने पीड़ितों के पुनर्वास और बच्चों की देखभाल में सहायता का भी प्रावधान रखा है।
सदन में मतभेद
विधेयक पर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। शिवसेना (यूबीटी) ने इसका समर्थन किया, जबकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसका विरोध जताया। एनसीपी के कुछ सदस्यों ने भी कुछ प्रावधानों पर आपत्ति दर्ज कराई। विपक्ष का कहना है कि इस कानून के दुरुपयोग की आशंका है और इससे लोगों को अनावश्यक परेशान किया जा सकता है। विपक्ष ने खासतौर पर 60 दिन पहले सूचना देने की शर्त पर सवाल उठाए। उनका मानना है कि इससे निजता प्रभावित हो सकती है और ग्रामीण क्षेत्रों में तनाव बढ़ सकता है। एनसीपी नेता इदरीस नायकवाड़ी ने इसे घटाकर सात दिन करने का सुझाव दिया। वहीं सरकार का तर्क है कि यह अवधि सुनिश्चित करती है कि धर्म परिवर्तन पूरी तरह स्वेच्छा से हो रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून किसी धर्म विशेष को लक्षित नहीं करता। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, इसका उद्देश्य केवल धोखे, दबाव और लालच के जरिए होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। सरकार का यह भी कहना है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में पहले से ऐसे कानून लागू हैं, और मौजूदा कानून इस तरह के मामलों को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं थे।





