
दवा निर्माण के लिए डोजियर आधारित लाइसेंस प्रणाली लागू होगी
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने दवा निर्माण को लेकर बड़ा निर्देश जारी किया है। इसके तहत अब पूरे देश में एक समान नियमों के आधार पर दवाओं का उत्पादन किया जाएगा और लाइसेंस प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाया जाएगा। नई व्यवस्था के अनुसार, देशभर में दवा निर्माण के लिए डोजियर आधारित लाइसेंस प्रणाली लागू होगी। फार्मा कंपनियों को गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी एक ही बार में विस्तृत डोजियर के रूप में प्रस्तुत करनी होगी। इस डोजियर में दवा की जांच रिपोर्ट, निर्माण प्रक्रिया और अन्य तकनीकी विवरण शामिल होंगे। डोजियर की समीक्षा के बाद ही स्थानीय औषधि नियंत्रक विभाग लाइसेंस जारी करने या अस्वीकार करने का निर्णय लेगा।
सूत्रों के मुताबिक, सीडीएससीओ ने उत्तर प्रदेश समेत सभी राज्यों के औषधि नियंत्रकों को इस प्रणाली को लागू करने के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश एफडीए को इसे समझाने के लिए नौ पृष्ठों का एक मार्गदर्शक दस्तावेज भी भेजा गया है। अलीगढ़ के औषधि नियंत्रण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस नई व्यवस्था से दवाओं की गुणवत्ता जांच अधिक सख्त और व्यवस्थित होगी, साथ ही कंपनियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा सकेगी। हालांकि, यह नियम आयुष दवाओं, कॉस्मेटिक उत्पादों और चिकित्सा उपकरणों के निर्माण पर लागू नहीं होगा। वर्तमान में अलग-अलग राज्यों में दवा लाइसेंस की प्रक्रिया अलग होने के कारण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। पिछले वर्ष मध्य प्रदेश में कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में नियमों के विपरीत लाइसेंस जारी होने का मुद्दा भी सामने आया था। नई प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ने और ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगने की उम्मीद है।





