
जेन-जी विरोध प्रदर्शनों में कथित संलिप्तता के आरोप
नेपाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को जेन-जी विरोध प्रदर्शनों में कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। उनके साथ पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है। यह कदम नई सरकार के गठन के कुछ ही समय बाद उठाया गया, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। काठमांडू वैली पुलिस के मुताबिक, दोनों नेताओं को सुबह के समय गिरफ्तार किया गया और अब आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई कानून के दायरे में की गई है, न कि किसी राजनीतिक प्रतिशोध के तहत। वहीं, केपी शर्मा ओली ने इसे राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित कदम बताते हुए अदालत में चुनौती देने की बात कही है।
जेन-जी आंदोलन और हिंसा की पृष्ठभूमि
पिछले वर्ष सितंबर में नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें जेन-जी आंदोलन के नाम से जाना गया। शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे ये प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गए और महज दो दिनों में 70 से अधिक लोगों की जान चली गई। इस घटना के बाद तत्कालीन सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे और अंततः ओली सरकार को सत्ता से बाहर होना पड़ा। हाल ही में गठित उच्चस्तरीय जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उस समय शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों ने हालात संभालने में गंभीर लापरवाही बरती। आयोग ने केपी शर्मा ओली, रमेश लेखक सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए सख्त कार्रवाई की सिफारिश की। रिपोर्ट में दोषियों के लिए अधिकतम 10 साल की सजा का भी प्रावधान सुझाया गया है।
नई सरकार का रुख
नए गृहमंत्री सुदन गुरूंग ने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और यह कार्रवाई न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। जांच आयोग ने केवल पूर्व प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ही नहीं, बल्कि कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की अनुशंसा की है, जिनमें तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग का नाम भी शामिल है। ऐसे में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं। यह पूरा मामला अब नेपाल की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कसौटी बन गया है।






