तालिबान के विदेश मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को प्रवेश न देने पर भड़की कांग्रेस

तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की दिल्ली में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि इस कार्यक्रम में महिला पत्रकारों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी सात दिन के भारत दौरे पर हैं। शुक्रवार को उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की, जिसके बाद उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसी दौरान महिला पत्रकारों को कार्यक्रम में एंट्री नहीं दी गई, जिस पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया। बताया जा रहा है कि यह प्रेस वार्ता अफगानिस्तान दूतावास में हुई थी, जहां महिला पत्रकारों को शामिल होने से रोका गया। गौरतलब है कि तालिबान मंत्री 9 से 16 अक्टूबर तक भारत दौरे पर हैं। अगस्त 2021 में अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद यह काबुल से भारत आने वाला पहला उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल है। अपने दौरे के पहले दिन मुत्ताकी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की और दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने के लिए सहयोग के रास्ते तलाशे।

प्रियंका गांधी ने उठाया सवाल
कांग्रेस महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की और इसे “भारत की सक्षम महिलाओं का अपमान” बताया। प्रियंका गांधी ने एक्स (X) पर लिखा कि अगर प्रधानमंत्री वास्तव में महिलाओं के अधिकारों को मान्यता देते हैं, तो फिर इस तरह का अपमान कैसे होने दिया गया?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भी सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब पुरुष पत्रकारों को पता चला कि उनकी महिला सहकर्मियों को आमंत्रित नहीं किया गया, तो उन्हें एकजुटता दिखाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार करना चाहिए था। उन्होंने इसे “हैरान करने वाला” बताया। कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिदंबरम ने भी भाजपा सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भले ही भारत को कुछ भू-राजनीतिक कारणों से तालिबान से बातचीत करनी पड़े, लेकिन उनके भेदभावपूर्ण और पुरानी सोच वाले नियमों को स्वीकार करना अनुचित है। उन्होंने विदेश मंत्रालय और एस. जयशंकर के रवैये को “बेहद निराशाजनक” बताया।

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