
गोवा के चर्चित नाइटक्लब अग्निकांड मामले में लूथरा भाइयों को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। दोनों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस हासिल करने का गंभीर आरोप है। इस हादसे में 25 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है। मापुसा की अतिरिक्त सत्र अदालत ने शुक्रवार को क्लब मालिक सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा की याचिका पर सुनवाई करते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। बचाव पक्ष के वकील पराग राव ने बताया कि कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया है। दोनों आरोपी इस समय नॉर्थ गोवा की कोलवाले सेंट्रल जेल में बंद हैं। घटना के बाद वे थाईलैंड फरार हो गए थे, लेकिन 17 दिसंबर को उन्हें डिपोर्ट कर भारत लाया गया।
फर्जी दस्तावेजों से लाइसेंस लेने का आरोप
मापुसा पुलिस ने दोनों भाइयों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि एक्साइज विभाग से लाइसेंस लेने के लिए नकली दस्तावेज जमा किए गए। खासतौर पर स्वास्थ्य अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर के जरिए एनओसी तैयार कर क्लब संचालित किया गया। अंजुना पुलिस पहले से आग की घटना की जांच कर रही थी, इसी दौरान फर्जीवाड़े का मामला उजागर हुआ। पुलिस के अनुसार दस्तावेजों में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं, जिससे आरोप और मजबूत हुए हैं। इसी आधार पर अदालत ने भी आरोपों को गंभीर मानते हुए जमानत देने से इनकार किया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि जिन दस्तावेजों को फर्जी बताया जा रहा है, वे पहले से पुलिस के कब्जे में हैं, इसलिए हिरासत की आवश्यकता नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपियों ने खुद इन दस्तावेजों के लिए आवेदन नहीं किया था। हालांकि कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया।
अन्य आरोपी को मिल चुकी है जमानत
इस मामले में एक अन्य मालिक अजय गुप्ता को पहले ही जमानत मिल चुकी है। ऐसे में लूथरा भाइयों को राहत न मिलना यह दर्शाता है कि कोर्ट ने उनकी भूमिका को अधिक गंभीर माना है। अदालत के इस फैसले के बाद जांच एजेंसियां और सख्ती बरत सकती हैं तथा मामले में आगे और पूछताछ व साक्ष्य जुटाने पर जोर दिया जाएगा। यह पूरा प्रकरण गोवा में सुरक्षा मानकों और लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।






