राजस्थान: जर्जर स्कूलों के भवनों की मरम्मत के लिए हाईकोर्ट के जज देंगे एक दिन का वेतन

कोर्ट ने समाज के अन्य वर्गों से भी योगदान देने की अपील की

राजस्थान में जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत को लेकर न्यायपालिका और सरकार दोनों स्तर पर गंभीर पहल सामने आई है। हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने एक दिन का वेतन देने की घोषणा की है, वहीं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल समेत दो अधिवक्ताओं ने कुल दो लाख रुपये के आर्थिक सहयोग का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही कोर्ट ने समाज के अन्य वर्गों विशेषकर नौकरशाहों और वेतनभोगी कर्मचारियों से भी योगदान देने की अपील की है।

दूसरी ओर, राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि 1 जुलाई से किसी भी जर्जर स्कूल भवन में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएंगी। नई शिक्षा नीति के तहत राज्य और जिला स्तर पर गठित कमेटियां सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगी, जबकि निजी स्कूलों के लिए सुरक्षा ऑडिट प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा। इस मामले की अगली सुनवाई 11 मई को निर्धारित की गई है। शनिवार को न्यायाधीश महेंद्र कुमार गोयल और न्यायाधीश अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने जर्जर स्कूल भवनों से संबंधित स्वप्रेरित और जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने स्कूल भवनों की सुरक्षा के लिए गाइडलाइन तैयार करने हेतु सुझाव आमंत्रित किए हैं, जिनके आधार पर आगे आदेश जारी किए जाएंगे। सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत राज्य स्तर पर शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समितियां गठित की गई हैं, जो अगले पांच वर्षों तक कार्य करेंगी। इन समितियों का उद्देश्य जर्जर स्कूल भवनों का पुनर्निर्माण और उनकी निगरानी सुनिश्चित करना है। सरकार ने पहले ही 12,335 करोड़ रुपये के व्यय का खाका प्रस्तुत किया है, जिसमें केंद्र सरकार से 409 करोड़ रुपये की मंजूरी भी मिल चुकी है। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था किसी स्कूल को गोद लेकर उसकी मरम्मत कराना चाहती है, तो उनके नाम स्कूल भवन पर स्थायी रूप से अंकित किए जाएंगे। इसी क्रम में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भरत व्यास ने डेढ़ लाख रुपये और अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने 50 हजार रुपये देने की घोषणा की है। राज्य स्तरीय समिति में शिक्षा विभाग के एसीएस की अध्यक्षता में 10 सदस्य शामिल होंगे, जिनमें वित्त सचिव, समग्र शिक्षा अभियान के स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर, सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर, एमएनआईटी के सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष, यूनिसेफ प्रतिनिधि, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष सहित एनजीओ और स्कूल एसोसिएशन के प्रतिनिधि शामिल हैं। वहीं जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है, जिसमें पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन, समग्र शिक्षा अभियान के प्रतिनिधि और सहायक अभियंता शामिल होंगे।

उल्लेखनीय है कि 25 जुलाई 2025 को झालावाड़ में एक जर्जर स्कूल भवन के ढहने से हुई दर्दनाक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। इस हादसे में 7 बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसी घटना के बाद स्कूल भवनों की सुरक्षा को लेकर व्यापक चिंता और सख्त कदम उठाने की जरूरत महसूस की गई।

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