
अपोलो-13 का 54 साल पुराना रिकॉर्ड टूटने की कगार पर
नासा का महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन आर्टेमिस II अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है और इतिहास रचने के बेहद करीब पहुंच चुका है। मिशन पूरा होते ही यह 54 साल पुराने अपोलो 13 के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगा। नासा इस पूरे अभियान और अंतरिक्ष यात्रियों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। हालांकि, इस दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को एक तकनीकी समस्या का सामना भी करना पड़ा है। आर्टेमिस II मिशन 53 वर्षों बाद इंसानों को फिर से चांद के करीब ले जा रहा है, जिससे इस अभियान को लेकर उत्सुकता और उम्मीदें दोनों चरम पर हैं। इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जो सोमवार तक चंद्रमा के नजदीक पहुंचने वाले हैं। यह दल चांद के उस हिस्से की तस्वीरें कैद करेगा, जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता। नासा के अपोलो प्रोग्राम के बाद इसे अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। अंतरिक्ष यात्री विक्टर ग्लोवर के अनुसार, जैसे-जैसे यान आगे बढ़ रहा है, पृथ्वी छोटी और चांद बड़ा नजर आने लगा है, जो उनके लिए एक अनोखा अनुभव है।
मिशन के दौरान ओरियन अंतरिक्ष यान में एक तकनीकी खामी भी सामने आई है। यान का टॉयलेट सिस्टम सही ढंग से काम नहीं कर रहा है और लॉन्च के बाद से इसमें बार-बार समस्या आ रही है। इंजीनियरों का मानना है कि पाइप में बर्फ जमने के कारण यह दिक्कत उत्पन्न हुई है। फिलहाल अंतरिक्ष यात्रियों को वैकल्पिक उपाय अपनाने पड़ रहे हैं। नासा के अधिकारियों का कहना है कि अंतरिक्ष में इस तरह की चुनौतियां सामान्य हैं और टीम स्थिति को प्रभावी ढंग से संभाल रही है। यह मिशन दूरी के मामले में भी नया कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है। आर्टेमिस II लगभग 4 लाख किलोमीटर की दूरी तय करेगा, जो अब तक किसी भी मानव मिशन द्वारा तय की गई सबसे अधिक दूरी होगी। इससे पहले यह रिकॉर्ड अपोलो 13 के नाम दर्ज था। इस अभियान की एक और खासियत यह है कि इसमें कनाडा के जेरेमी हैनसेन शामिल हैं, जो चांद की यात्रा करने वाले पहले गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री बनेंगे। वहीं क्रिस्टीना कोच इस मिशन की पहली महिला और विक्टर ग्लोवर पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री हैं।

करीब 10 दिनों तक चलने वाले इस मिशन के तहत 10 अप्रैल को ओरियन यान प्रशांत महासागर में उतरकर पृथ्वी पर वापसी करेगा। नासा का यह अभियान भविष्य में चांद पर स्थायी मानव बेस स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एजेंसी का लक्ष्य है कि वर्ष 2028 तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास मानव लैंडिंग सुनिश्चित की जाए।






