
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को पहले 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जिसके बाद अब उन्होंने संभावित सैन्य कार्रवाई का दिन और समय भी संकेतित कर दिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए इशारा किया कि मंगलवार रात आठ बजे ईरान पर बड़ा हमला हो सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य को न खोले जाने को लेकर उनकी नाराजगी उनके बयानों में साफ नजर आ रही है। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत स्थित प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने वैश्विक शांति की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय कूटनीति की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर भारत अहम भूमिका निभा सकता है। साथ ही, अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई को उन्होंने गंभीर भूल बताया। उनके अनुसार, यह केवल ईरान के खिलाफ नहीं, बल्कि मानवता और पूरी दुनिया के खिलाफ युद्ध जैसा है, जिसका असर कई देशों के नागरिकों पर पड़ रहा है।
ट्रंप की भाषा पर सवाल
ट्रंप द्वारा दी गई धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. इलाही ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की भाषा उसके व्यक्तित्व, नैतिकता और मानवता को दर्शाती है। उन्होंने टिप्पणी की कि अभद्र भाषा का प्रयोग व्यक्ति के चरित्र को उजागर करता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई अमेरिकी सांसदों ने भी इस तरह की भाषा के उपयोग का समर्थन नहीं किया है। ट्रंप ने पहले ईरान को 48 घंटे की चेतावनी दी थी। इसके बाद उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर “मंगलवार रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम)” लिखकर संभावित कार्रवाई का संकेत दिया। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि ईरान ने रास्ता नहीं खोला, तो अमेरिका उसके ऊर्जा संसाधनों और बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है। उनके बयान में पावर प्लांट और पुलों पर हमले तक की बात कही गई थी।
युद्ध रोकने के लिए वैश्विक पहल जरूरी
डॉ. इलाही ने कहा कि इस संघर्ष को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होना होगा। उनके मुताबिक, युद्ध के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और माल ढुलाई की लागत में इजाफा हुआ है, जिससे आम लोगों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि वैश्विक नेता एक मंच पर आकर इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाएं और अमेरिका से युद्ध रोकने की अपील करें।




